राज्य गठन के बाद भाजपा और राजद के बीच घुमती रही है राजनीति
संजीव/
गोड्डा : झारखंड विधान सभा चुनाव की घोषणा के साथ ही जिले के राजनीतिक दलों की सक्रियता बढ़ गई है। वहीं राजनीतिक दलों द्वारा रोज-रोज किए जा रहे घोषणा और दूसरी तरफ जनता के समक्ष परोसे जा रहे वायदों का दौर समाप्त हो गया है। ऐसे में चारों तरफ चुनाव आयोग द्वारा मतदान के लिए मुकर्रर तारीख और प्रत्याशियों के नाम को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
दो बार रजद तो तीन बार भाजपा ने लहराया जीत का परचम
मालूम हो कि अलग राज्य गठन के बाद वर्ष 2000 में हुए चुनाव में गोड्डा सीट पर राजद प्रत्याशी संजय प्रसाद यादव ने जीत का परचम जहां लहराया था। वहीं 2005 के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी मनोहर टेकरीवाल ने राजद प्रत्याशी संजय यादव को पराजित किया लेकिन 2009 के चुनाव में एक बार फिर इस सीट पर राजद के संजय प्रसाद यादव ने कब्जा जमाया। इसके बाद से ही यहां की राजनीति राजद और भाजपा के इर्द-गिर्द घूमती रही। फलस्वरूप 2014 के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी रघुनंदन मंडल की जीत हुई लेकिन उनकी असामयिक निधन के बाद वर्ष 2016 के उपचुनाव में स्व० रघुनंदन मंडल के पुत्र अमित मंडल ने भाजपा से अपनी जीत दर्ज कर 2019 के चुनाव में भी अपनी जीत को बरकरार रखा। दोनों ही चुनाव में राजद प्रत्याशी संजय प्रसाद यादव निकटतम प्रतिद्वंद्वी रहे थे।
अब तक हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का रहा है दबदबा
ज्ञात रहे कि गोड्डा विधानसभा सीट पर कभी कांग्रेस और झामुमो का भी दबदबा रहा है। 1952 से 2019 तक एक उपचुनाव सहित विधानसभा के 17 चुनाव हुए जिसमें कांग्रेस 5 बार, भाजपा 4 बार, झामुमो, राजद और झारखंड पार्टी दो-दो बार जबकि जनता पार्टी व संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी ने एक-एक बार इस सीट पर जीत दर्ज की। गत विधानसभा चुनाव में भाजपा से कई दावेदार हैं बाबजूद गोड्डा सीट पर अमित मंडल की दावेदारी प्रबल मानी जा रही है। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि 2016 और 2019 में मिली जीत साबित कर दिखाया है कि अमित मंडल राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी हैं। ऐसे 1985 और 1990 में अमित मंडल के दादा सुमृत मंडल झामुमो के टिकट पर जीत दर्ज कर विधायक बने तो 2014 में उनके पिता रघुनंदन मंडल भाजपा के टिकट पर जीत दर्ज की थी।
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