नई दिल्ली । इंडिया ब्लॉक की सोमवार को होने वाली बैठक से पहले मतभेद सामने आ गए हैं। डीएमके द्वारा कांग्रेस की मौजूदगी के कारण इस बैठक से दूर रहने की घोषणा के बाद अब सीपीआई-एम ने भी कांग्रेस की कार्यशैली पर नाराजगी जताई है। सीपीआई-एम ने कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा कि केरल में उसके नेताओं द्वारा लगाए गए बीजेपी के साथ ‘डील’ के आरोप गठबंधन की मूल भावना के खिलाफ हैं। सूत्रों का कहना है कि झारखंड राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस द्वारा उम्मीदवार उतारे जाने से बाद से हेमंत सोरेन की पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा भी नाखुश है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सीपीआई-एम महासचिव एम ए बेबी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण मांगा है।
साथ ही इस पत्र की कई कॉपियां गठबंधन के अन्य सहयोगी दलों को भी भेजी हैं। बेबी ने पत्र में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खडग़े के बयानों पर ऐतराज जताया है। उन्होंने कहा कि केरल विधानसभा चुनाव अभियान में कांग्रेस ने बार-बार ये प्रचार किया कि सीपीआई-एम और बीजेपी के बीच राजनीतिक समझौता है और तत्कालीन सीएम पिनराई विजयन और पीएम मोदी के बीच खास डील हुई है। सीपीआई-एम ने इसे विपक्षी गठबंधन की भावना के खिलाफ बताया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक माकपा नेता ने इन आरोपों को पूरी तरह से मनगढ़ंत करार दिया है जिसे वो किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं कर सकते! उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व को याद दिलाया कि केरल की धरती पर आरएसएस और बीजेपी के खिलाफ सीधे राजनीतिक लड़ाई लड़ते हुए माकपा ने अपने सैकड़ों समर्पित कार्यकर्ताओं को खोया है। बेबी ने अपने पत्र में कहा कि इंडिया ब्लॉक बीजेपी के खिलाफ राजनीतिक लड़ाई के लिए बना था और ऐसे वक्त में सहयोगी दलों पर ही संदेह जताना गठबंधन की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इन आरोपों पर स्थिति स्पष्ट नहीं की गई तो 8 जून यानी सोमवार की गठबंधन बैठक से पहले ही एकता पर सवाल खड़े हो जाएंगे।
रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस के रवैये पर कड़े सवाल उठाने के बावजूद सीपीआई-एम ने विपक्षी एकजुटता और समन्वय के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है। बेबी ने साफ किया कि उनकी पार्टी संसद के अंदर मोदी सरकार की तानाशाही, सांप्रदायिक और जनविरोधी नीतियों का मजबूती से विरोध करने के लिए अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर काम करती रहेगी। वहीं, दिल्ली में होने वाली इस रणनीतिक बैठक में ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी, उद्धव ठाकरे, अखिलेश यादव और राहुल गांधी जैसे शीर्ष नेताओं के शामिल होने की संभावना है। हालांकि, कांग्रेस के साथ मतभेदों के चलते डीएमके के इस बैठक में शामिल होने की उम्मीद कम हैं। दूसरी ओर आम आदमी पार्टी ने भी इस बैठक से दूरी बना ली है, जिससे विपक्षी गठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उधर, झारखंड में आगामी राज्यसभा चुनावों में दो राज्यसभा सीटों में से एक पर कांग्रेस द्वारा अपने उम्मीदवार प्रणव झा की घोषणा करने पर जेएमएम भी कांग्रेस से नाराज है।
सूत्रों का कहना है कि सीएम हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ जेएमएम राज्य की दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारना चाहती थी, क्योंकि जेएमएम-कांग्रेस गठबंधन के पास दोनों सीटें जीतने के लिए पर्याप्त संख्या बल है। इसी बीच शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने गठबंधन में किसी भी तरह की फूट या बिखराव के दावों को खारिज किया है। राउत ने कहा कि भले ही डीएमके ने इस बैठक से दूरी बना ली हो, लेकिन विपक्ष को तमिलनाडु में टीवीके के रूप में एक मजबूत वैकल्पिक मित्र मिल गया है।


