* संताल परगना के कई दर्जनों कॉलेजों में संताली विषय की पढ़ाई तक नहीं होती
* पूरे विश्वविद्यालय में 165 शिक्षकों की जरूरत, लेकिन कार्यरत हैं मात्र 7 स्थायी शिक्षक
* आक्रोशित छात्र-छात्राओं ने कुलसचिव को सौंपा ज्ञापन, सभी कॉलेजों में पढ़ाई और अविलंब बहाली की मांग
ब्यूरो
दुमका: संताल परगना जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्र में उच्च शिक्षा का एकमात्र प्रमुख केंद्र, सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय दुमका इन दिनों खुद अपनी क्षेत्रीय और मातृभाषा संताली की उपेक्षा को लेकर सवालों के घेरे में है। हालात यह हैं कि विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले कई महाविद्यालयों में संताली विषय की पढ़ाई तक उपलब्ध नहीं है, और जहां पढ़ाई हो रही है वहां शिक्षकों का घोर अभाव है।
इस स्थिति से परेशान होकर स्नातकोत्तर संताली विभाग और विभिन्न कॉलेजों के सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने एकजुट होकर विश्वविद्यालय के कुलसचिव को एक ज्ञापन सौंपा है। छात्रों ने अपने मांग पत्र में विश्वविद्यालय प्रशासन का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर आकृष्ट कराया है।
छात्रों द्वारा सौंपे गए आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में विश्वविद्यालय के अंतर्गत केवल बारह महाविद्यालयों और एक स्नातकोत्तर विभाग में ही संताली की पढ़ाई चल रही है। वर्तमान में संताली पढ़ने वाले छात्रों की अनुमानित संख्या 4200 के करीब है। छात्र-शिक्षक अनुपात के अनुसार इन छात्रों के लिए कम से कम 165 शिक्षकों की आवश्यकता है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि पूरे विश्वविद्यालय में संताली के मात्र 7 स्थायी और 11 आवश्यकता आधारित शिक्षक ही कार्यरत हैं।
ज्ञापन में दिए गए विवरण के अनुसार ए.एस. कॉलेज देवघर, जामताड़ा कॉलेज, मॉडल कॉलेज सहित लगभग 15 से अधिक ऐसे कॉलेज हैं जहां संताली की पढ़ाई ही नहीं होती है। वहीं संताल परगना कॉलेज दुमका और गोड्डा कॉलेज जैसे संस्थानों में जहां पढ़ाई होती है, वहां भी शिक्षकों की भारी कमी है। इतने कम शिक्षकों के भरोसे हजारों आदिवासी छात्रों का भविष्य गढ़ा जा रहा है जो उच्च शिक्षा के दृष्टिकोण से उन्हें काफी पीछे धकेल रहा है।
छात्रों ने प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले सभी महाविद्यालयों में संताली की पढ़ाई अविलंब आरंभ की जाए और छात्रों की संख्या के अनुपात में शिक्षकों की जल्द से जल्द नियुक्ति की जाए।
अपनी मांगों को गंभीरता से लेते हुए छात्रों ने इस ज्ञापन की प्रतिलिपि झारखंड के माननीय मुख्यमंत्री, कुलाधिपति, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री, मुख्य सचिव और कुलपति को भी प्रेषित की है। इस पत्र पर काजल किस्कू, उर्मिला हेम्ब्रम, नरेश मुर्मू, सिकंदर हेम्ब्रम सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं के हस्ताक्षर मौजूद हैं।


