नई दिल्ली । मधुमेह से लेकर पाचन संबंधी समस्याओं तक में कसैले स्वाद वाले करेले के अनगिनत फायदे हैं। करेले के बीजों को लेकर अधिकतर लोग असमंजस में पड़ जाते हैं कि क्या इन्हें फेंक देना चाहिए या ये भी फायदेमंद हो सकते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, नरम और सफेद करेले के बीज, विशेषकर जब करेला ताजा और कम पका हुआ हो, तो सीमित मात्रा में खाए जा सकते हैं। ये बीज अक्सर सब्जी के साथ पकाकर खाने के लिए सुरक्षित माने जाते हैं और कई पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। इनमें पर्याप्त मात्रा में फाइबर पाया जाता है, जो पाचन क्रिया को सुचारू बनाए रखने में मदद करता है और पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराता है, जिससे अनावश्यक खान-पान से बचा जा सकता है। इसके अलावा, करेले के बीजों में एंटीऑक्सीडेंट्स और स्वस्थ फैटी एसिड भी पाए जाते हैं, जो शरीर को कई तरह के लाभ पहुंचा सकते हैं।
कुछ प्रारंभिक शोध यह भी सुझाव देते हैं कि इन बीजों में ऐसे बायोएक्टिव कंपाउंड्स मौजूद होते हैं जो शरीर में सूजन को कम करने और रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में सहायक हो सकते हैं। हालांकि, इस दिशा में अभी और गहन वैज्ञानिक शोध की आवश्यकता है ताकि इनके प्रभावों की पूरी पुष्टि की जा सके। हालांकि, अत्यधिक पके हुए करेले के लाल या सख्त बीजों का सेवन करने से बचने की सलाह दी जाती है। ये बीज पचने में काफी भारी हो सकते हैं और कुछ व्यक्तियों में पेट से जुड़ी समस्याएं, जैसे पेट दर्द, गैस या दस्त का कारण बन सकते हैं।
छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और कमजोर पाचन वाले व्यक्तियों को करेले के बीजों का सेवन बेहद सावधानी से करना चाहिए। इन समूहों के लिए, सख्त बीजों को पूरी तरह से हटा देना ही बेहतर विकल्प माना जाता है। अक्सर लोग सबसे बड़ी गलती यह करते हैं कि वे बिना सोचे-समझे हर प्रकार के करेले के बीज को निकालकर फेंक देते हैं, जबकि नरम और ताजे बीजों को उचित मात्रा में खाया जा सकता है। वहीं, कुछ लोग यह मानकर सभी बीजों का सेवन कर लेते हैं कि वे पूरी तरह से फायदेमंद हैं। वास्तविकता यह है कि बीज की गुणवत्ता और सेवन की मात्रा दोनों ही महत्वपूर्ण हैं। यदि बीज सफेद, मुलायम और छोटे हैं, तो वे आमतौर पर सुरक्षित होते हैं, लेकिन लाल, सख्त या बहुत अधिक पके हुए बीजों को हमेशा हटा देना ही समझदारी है।


