कौन गठबंधन किस पर पड़ रहा है भारी !
राज्य और राजनीति
चंदन मिश्र
झारखंड में जब से विधानसभा के चुनाव की दस्तक पड़ी है, सियासी दल भी मतदाताओं को लुभाने की हर कोशिश में जी जान से जुट गए हैं। प्रमुख विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने झारखंड में परिवर्तन यात्रा शुरू की है। परिवर्तन यात्रा पहले सभी पांच प्रमंडलों में आयोजित की गई। उसके बाद हर प्रमुख शहरों में भी यात्रा निकाली गई। अब यह यात्रा कस्बों और छोटे शहरों की ओर रुख कर चुकी है। वहीं दूसरी ओर सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति ने मइयां सम्मान यात्रा शुरू की है। इसके साथ साथ सरकार की विकास यात्रा भी चल रही है। सरकार ने 18 वर्ष से लेकर 50 वर्ष की आयु वर्ग की महिलाओं को हर महीने एक हजार रुपए मइयां सम्मान राशि की योजना शुरू की है। अब इसके बहाने झामुमो कांग्रेस मइयां सम्मान यात्रा शुरू कर चुनावी हवा बनाने में जुट गए हैं। इस यात्रा में सरकार की दो महिला मंत्री बेबी देवी और दीपिका पांडेय सिंह के अलावा गांडेय की विधायक तथा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन भी साथ साथ चल रहीं हैं। इनके साथ क्षेत्र के विधायक और पार्टी नेता भी मंच पर मौजूद रहते हैं। इसके साथ ही सरकार की विकास यात्रा में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन होते हैं। इनके साथ कांग्रेस और राजद के मंत्री विधायक भी शामिल रहते हैं। कुल मिलाकर इन सियासी यात्रियों का एक ही निहितार्थ है, अपने अपने वोटरों को लुभाना, रिझाना और अपने पक्ष में करना। सभी दल इस काम में पूरी शिद्दत के साथ लगे हुए हैं। भाजपा इस बार बहुत आक्रामक ढंग से चुनाव घोषणा के बहुत पहले ही चुनावी अभियान शुरू कर चुकी है। भाजपा कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है।
पीएम से सीएम तक यात्रा में शामिल
भारतीय जनता पार्टी की परिवर्तन यात्रा में प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी के अलावा सांसद, विधायक और पार्टी के प्रदेश प्रभारी शामिल हैं। परिवर्तन यात्रा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्र रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय कृषि मंत्री और झारखंड के चुनाव प्रभारी शिवराज सिंह चौहान , सह प्रभारी और असम के मुख्यमंत्री हेमंता बिस्वा सरमा,केंद्रीय महिला कल्याण मंत्री अन्नपूर्णा देवी, पूर्व कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा के अलावा मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़, राजस्थान, उत्तराखंड के मुख्यमंत्रियों की अलग अलग स्थानों पर परिवर्तन यात्रा के दौरान सभाएं हुईं। अभी भी ये सभाएं निरंतर हो रही हैं। दो अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी परिवर्तन यात्रा का समापन हजारीबाग में करेंगे। हजारीबाग में बड़ी सभा आयोजित की जा रही है।
तीन महिलाएं संभाल रहीं मोर्चा
इधर झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस गठबंधन की तीन महिला नेता बेबी देवी, दीपिका पांडेय और कल्पना सोरेन ने मइयां सम्मान यात्रा में मोर्चा संभाल रही हैं। कल्पना सोरेन लोकसभा चुनाव के दौरान ही चुनावी अभियान की अगुवाई कर अपनी प्रतिभा और वक्तृत्व क्षमता का परिचय दे चुकी हैं। महिला नेतृत्व के नाम पर कल्पना सोरेन झामुमो की प्रमुख नाम हैं। बेबी देवी सरकार की मंत्री हैं, किंतु वह भीड़ खींचने वाली वक्ता नहीं हैं। लेकिन कांग्रेस की नेता और मंत्री दीपिका पांडेय भी अच्छी वक्ता हैं। झामुमो और कांग्रेस ने इस अभियान को फिलहाल इन महिला नेताओं के हवाले कर दिया है। अब यही जिलों और प्रमंडलों में अपने वोटरों को लुभाने की कोशिश में जुटी हुई हैं।
एक दूसरे को मात देने की कोशिश
चुनाव ज्यों ज्यों करीब आएगा, ऐसी सियासी यात्राएं दूसरे स्वरूप में बढ़ती जायेंगी। जिला दर जिला, गांव -गांव और शहर – शहर चुनावी यात्राएं चलेंगी। सत्ता पक्ष और विपक्ष अपनी अपनी सियासी चाल से सामने वाले को मात देने की कोशिश शुरू हो गई है। झामुमो और कांग्रेस ने मइयां सम्मान यात्रा पलामू प्रमंडल के गढ़वा जिला से शुरू की। पलामू होते हुए यह यात्रा आगे बढ़ रही है। चुनावी अखाड़े में राजनीतिक दल यात्राएं निकाल कर सभा करते हैं। इन सभाओं में भीड़ इक्कठी होती है और भीड़ के माध्यम से अपनी पार्टी का संदेश, भविष्य के कार्यक्रम और आगामी योजनाओं के बारे में बताया जाता है।
विपक्ष गिना रहा खामियां, सरकार अपनी उपलब्धियां
भाजपा परिवर्तन यात्रा के माध्यम से वर्तमान सरकार की खामियों को गिना रही है। चुनाव जीतने के पहले झामुमो कांग्रेस पर उनके द्वारा किए गए वायदे पूरा नहीं करने का आरोप लगा रही है। भाजपा राज्य के संताल परगना इलाके में बांग्लादेशी घुसपैठियों का मामला भी पूरी गंभीरता से उठा रही है। भाजपा के केंद्रीय और प्रांतीय नेता दावा कर रहे हैं कि भाजपा की सरकार बनी तो बांग्लादेशी घुसपैठियों को बाहर निकालेंगे। भाजपा नेता राज्य की सरकार के भ्रष्टाचार को भी चुनावी मुद्दा बनाया है।
इधर झामुमो और कांग्रेस नेता सम्मान यात्रा में अपनी सरकार की उपलब्धियां गिना रही हैं। मइयां सम्मान योजना को महिलाओं के लिए आत्मसम्मान बढ़ाने की योजना बता रही हैं। झामुमो और कांग्रेस की नेता भाजपा की केंद्र सरकार के साथ साथ पार्टी नेताओं को कोसना नहीं भूलती हैं।
कुल मिलाकर देखें तो राजनीतिक दलों की यह चुनावी यात्राएं चुनावी अभियान का एक अहम हिस्सा बन चुकी हैं। अब देखना होगा कि वोटर किनकी चुनावी यात्राओं से कितना प्रभावित हुए और किसे अपना हितैषी माना, यह चुनाव परिणाम ही बताएगा।
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