जमशेदपुर : जमशेदपुर में बुधवार तड़के प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी छापामारी की कार्रवाई को अंजाम दिया है। यह पूरी कार्रवाई कथित तौर पर 750 करोड़ रुपये के जीएसटी घोटाले और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) की धोखाधड़ी से जुड़ी हुई बताई जा रही है।
बिष्टुपुर में सुबह-सुबह ईडी की रेड सुबह करीब 7:00 बजे केंद्रीय जांच एजेंसी के अधिकारी सफेद गाड़ियों में सवार होकर बिष्टुपुर के एन रोड स्थित बीएस टावर पहुंचे। यहाँ ग्राउंड फ्लोर पर स्थित स्क्रैप व्यवसायी ज्ञानचंद जायसवाल उर्फ बबलू जायसवाल के आवासीय दफ्तर पर ईडी की टीम ने अचानक दबिश दी।
6 ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई
जानकारी के अनुसार, जांच एजेंसी बबलू जायसवाल से संबंधित कुल 6 अलग-अलग ठिकानों पर तलाशी ले रही है, जिनमें से 3 ठिकाने अकेले जमशेदपुर में हैं। इसके साथ ही बबलू जायसवाल के ऑडिटर संजय पारेख और उनसे जुड़े तीन अन्य लोगों के परिसरों पर भी ईडी की टीमों ने धावा बोला है।
जांच और सुरक्षा के कड़े इंतजाम
ईडी की यह रेड ‘प्रीवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट’, 2002 की धारा 17 के तहत की जा रही है। जांच अधिकारी मौके से वित्तीय लेन-देन, बिलिंग और जीएसटी से जुड़े महत्वपूर्ण कागजात व कंप्यूटर रिकॉर्ड्स खंगाल रहे हैं। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए परिसरों के बाहर सीआरपीएफ के जवानों और अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है।
फिलहाल, सभी ठिकानों पर कार्रवाई जारी है। अधिकारियों के मुताबिक, छापामारी पूरी होने और जब्त दस्तावेजों के आंकलन के बाद ही मामले में कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने आएगा।
इस घोटाले का इतिहास
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जमशेदपुर में बड़ी कार्रवाई करते हुए 734 करोड़ रुपये के बहुचर्चित माल एवं सेवा कर (जीएसटी) घोटाले के खिलाफ जांच का दायरा काफी बढ़ा दिया है। इस पूरे आपराधिक नेटवर्क का मुख्य सूत्रधार कोलकाता का व्यवसायी शिव कुमार देवड़ा बताया जा रहा है, जो वर्तमान में रांची की बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार (होटवार) में बंद है। ईडी की इस हालिया छापामारी से फर्जीवाड़े में शामिल क्षेत्र के कई अन्य बड़े और रसूखदार कारोबारियों में हड़कंप मच गया है।
फर्जी बिलिंग से करोड़ों के इनपुट टैक्स क्रेडिट का खेल
जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपियों ने कई राज्यों में फैली 135 फर्जी कंपनियों का एक जटिल तंत्र (सिंडिकेट) तैयार किया था। बिना किसी वास्तविक सामान की खरीद-बिक्री के, इन फर्जी शेल कंपनियों के जरिए लगभग 5,000 करोड़ रुपये के फर्जी चालान/बिल तैयार किए जाते थे। इन जाली बिलों के आधार पर सरकारी खजाने से 734 करोड़ रुपये से अधिक का फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट हासिल कर अन्य लाभार्थियों तक पहुंचाया जाता था, जिसके बदले भारी कमीशन वसूला जाता था।
प्रारंभिक जीएसटी जांच से ईडी की मनी लॉन्ड्रिंग कार्रवाई तक
इस मामले का सिलसिला वर्ष 2024 में शुरू हुआ, जब जीएसटी विजिलेंस टीम ने शिव कुमार देवड़ा को 150 करोड़ रुपये से अधिक के फर्जीवाड़े के आरोप में कोलकाता से गिरफ्तार किया था। हालांकि, समय पर आरोप पत्र दाखिल न होने के कारण उसे तब वित्तीय अपराध अदालत से जमानत मिल गई थी।
इसके बाद, धोखाधड़ी के तार गहरे जुड़े होने के कारण ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम के तहत मामले की जांच अपने हाथ में ली। मई 2025 में ईडी ने शिव कुमार देवड़ा, मोहित देवड़ा और अमित गुप्ता को कोलकाता से गिरफ्तार किया। जांच आगे बढ़ने पर जुगसलाई (जमशेदपुर) के प्रमुख कारोबारी अमित अग्रवाल उर्फ विक्की भालोटिया का नाम भी सामने आया, जिसे बाद में जेल भेज दिया गया।
संपत्तियों की जब्ती और आगे का दायरा
ईडी ने विशेष पीएमएलए अदालत में दायर अपनी चार्जशीट में चार प्रमुख आरोपियों के नाम दर्ज किए हैं। अपराध से अर्जित धन पर शिकंजा कसते हुए ईडी ने अक्टूबर 2025 में कोलकाता और हावड़ा में स्थित करीब 15.41 करोड़ रुपये मूल्य की 10 अचल संपत्तियों को अस्थाई रूप से जब्त कर लिया।
जांच एजेंसी स्पष्ट कर चुकी है कि यह मामला केवल कागजी बिलों तक सीमित नहीं है, बल्कि अवैध कमाई से खरीदी गई संपत्तियों, लेन-देन के नेटवर्क और पर्दे के पीछे छिपे अन्य अंतिम लाभार्थियों की भी गहन जांच की जा रही है। अंतिम न्यायिक निष्कर्ष आने वाली अदालती कार्यवाही और केंद्रीय एजेंसियों की आगामी जांच पर निर्भर करेंगे।
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