रांची। झारखंड के बहुचर्चित ग्रामीण कार्य विभाग मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 5वीं सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट (चार्जशीट) दाखिल की है। यह शिकायत 17 मार्च 2026 को रांची स्थित पीएमएलए स्पेशल कोर्ट में दायर की गई। इस नई चार्जशीट में 14 इंजीनियरों और विभागीय अधिकारियों को आरोपी बनाया गया है। इसके साथ ही इस मामले में कुल आरोपियों की संख्या बढ़कर 36 हो गई है। ईडी ने यह कार्रवाई पीएमएलए की विभिन्न धाराओं के तहत की है। यह केस एसीबी, जमशेदपुर में दर्ज एफआईआर संख्या 13/2019 से जुड़ा है। जांच में खुलासा हुआ है कि ग्रामीण कार्य विभाग, आरडीएसजेड और जेएसआरआरडीए में टेंडर आवंटन के बदले कमीशनखोरी का एक संगठित नेटवर्क चल रहा था। ईडी के मुताबिक टेंडर वैल्यू का करीब 3 प्रतिशत कमीशन लिया जाता था। कमीशन का बंटवारा तय तरीके से किया जाता था। इस नेटवर्क के जरिए बड़े स्तर पर अवैध वसूली की जाती थी। करीब 3,048 करोड़ के टेंडर आवंटन में से ₹90 करोड़ से अधिक को ‘अपराध की आय’ बताया गया है।
जांच एजेंसी के अनुसार 1.35% हिस्सा तत्कालीन मंत्री आलमगीर आलम तक, 0.65% विभागीय सचिव स्तर तक, शेष राशि मुख्य अभियंताओं और अधीनस्थ इंजीनियरों में बांटी जाती थी। नई चार्जशीट में रिटायर्ड चीफ इंजीनियर, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर
असिस्टेंट इंजीनियर, पूर्व इंजीनियर-इन-चीफ के नाम शामिल है। ईडी के अनुसार, सभी आरोपियों की भूमिका अवैध कमीशन की वसूली, संग्रह और वितरण में पाई गई है।अब तक ईडी की कार्रवाई 52 ठिकानों पर छापेमारी और नौ लोगों की गिरफ्तारी हुई है। लगभग 38 करोड़ नकद बरामद करीब 4 करोड़ की संपत्ति अटैच 8 लग्जरी वाहन जब्त की है। गिरफ्तार लोगों में आलमगीर आलम और उनके करीबी भी शामिल हैं, जो फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।


