सरकारी गाड़ी नहीं, साइकिल से कार्यालय पहुंचते हैं अधिकारी; 100 किलो से 70 किलो तक का सफर बना मिसाल
साइकिल चलाइए, खर्च घटाइए, दिल बचाइए:डॉ. राजशेखर
एस.के. झा. ‘सुमन’
दुमका। अक्सर सरकारी अधिकारियों की पहचान चमचमाती गाड़ियों और व्यस्त जीवनशैली से जुड़ी होती है, लेकिन दुमका के जिला आपूर्ति पदाधिकारी डॉ. राजशेखर इस धारणा को बदलते नजर आते हैं। दुधानी स्थित अपने आवास से लेकर पुराना समाहरणालय भवन स्थित कार्यालय तक वे प्रतिदिन साइकिल से पहुंचते हैं। यह सिर्फ उनका आवागमन नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, सादगी, आत्मानुशासन और पर्यावरण संरक्षण का जीवंत संदेश है।
करीब सात-आठ वर्ष पहले एक समय ऐसा भी था जब डॉ. राजशेखर का वजन 100 किलोग्राम से अधिक हो चुका था। बढ़ते वजन के कारण वे कई स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। डॉक्टरों की सलाह पर उन्होंने साइकिलिंग और दौड़ को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया। धीरे-धीरे यही आदत उनकी जिंदगी बदलने का माध्यम बन गई। नियमित अभ्यास और अनुशासित जीवनशैली के बल पर उन्होंने अपना वजन घटाकर लगभग 70 किलोग्राम कर लिया और आज पूरी तरह फिट जीवन जी रहे हैं।


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व्यस्तता के बीच निकाला स्वास्थ्य का रास्ता
जिला आपूर्ति पदाधिकारी जैसा जिम्मेदार पद संभालने वाले डॉ. राजशेखर के लिए समय निकालना आसान नहीं है। इसके बावजूद उन्होंने स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी। घर और कार्यालय के बीच लगभग ढाई किलोमीटर की दूरी को उन्होंने अपनी फिटनेस का साधन बना लिया। रोजाना आने-जाने में पांच किलोमीटर की साइकिल यात्रा उनके लिए व्यायाम के साथ मानसिक शांति का भी माध्यम बन चुकी है।
उनका कहना है कि दिनभर की प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बीच साइकिल चलाने से उन्हें यह संतोष मिलता है कि उन्होंने अपने शरीर और स्वास्थ्य के लिए कुछ सकारात्मक किया है। उनके अनुसार स्वास्थ्य ऐसी संपत्ति है जिसे किसी बाजार से खरीदा नहीं जा सकता, इसके लिए स्वयं जागरूक और अनुशासित होना पड़ता है।

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सादगी ऐसी कि बाजार भी साइकिल से जाते हैं
डॉ. राजशेखर का जीवन सिर्फ फिटनेस तक सीमित नहीं है, बल्कि सादगी भी उनकी पहचान बन चुकी है। जहां आज कई लोग छोटे-छोटे निजी कार्यों के लिए भी दूसरों पर निर्भर रहते हैं, वहीं वे घर की जरूरतों के लिए स्वयं साइकिल से बाजार जाकर सब्जियां और अन्य सामान खरीदते हैं। स्थानीय आवागमन में वे सरकारी वाहन का उपयोग नहीं करते। केवल जिला भ्रमण या विशेष प्रशासनिक परिस्थितियों में ही सरकारी गाड़ी का सहारा लेते हैं।
उनका मानना है कि साइकिल न केवल ईंधन की बचत करती है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान देती है।

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मैराथन के धावक भी हैं डॉ. राजशेखर
साइकिलिंग के साथ-साथ डॉ. राजशेखर एक उत्कृष्ट मैराथन धावक भी हैं। पिछले कई वर्षों से वे विभिन्न मैराथन प्रतियोगिताओं में भाग लेते रहे हैं। वर्ष 2018 में आयोजित पटना मैराथन में उन्होंने अपनी श्रेणी में तीसरा स्थान प्राप्त कर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की थी। इस उपलब्धि के लिए उन्हें भारत के महान एथलीट ‘फ्लाइंग सिख’ मिल्खा सिंह के हाथों सम्मान और नकद 5000 हजार रुपए पुरस्कार भी प्राप्त हुआ था।
इसके अलावा वे देश के प्रसिद्ध फिटनेस आइकन और अभिनेता मिलिंद सोमन के साथ भी मैराथन दौड़ चुके हैं। खेल और फिटनेस के क्षेत्र में उनकी सक्रियता यह साबित करती है कि इच्छाशक्ति मजबूत हो तो व्यस्ततम जीवन में भी स्वास्थ्य के लिए समय निकाला जा सकता है।अच्छे स्वास्थ्य के बिना हर सेवा अधूरी रह जाती है और इसमें साइकिल एक बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए साइकिल चलाने का आह्वान करते रहे हैं, लेकिन डॉ. राजशेखर का यह अभियान पूरी तरह से उनकी अपनी सेहत और आत्म-प्रेरणा से जुड़ा हुआ है।
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युवाओं और समाज के लिए प्रेरणा
डॉ. राजशेखर की कहानी केवल एक अधिकारी की व्यक्तिगत सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है जो समय की कमी या व्यस्तता का हवाला देकर अपने स्वास्थ्य की उपेक्षा करते हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि जीवनशैली में छोटे-छोटे सकारात्मक बदलाव बड़े परिणाम ला सकते हैं।
साइकिल के दो पहियों पर चल रही यह प्रेरक यात्रा आज दुमका में चर्चा का विषय बनी हुई है। एक ओर यह स्वास्थ्य और फिटनेस का संदेश दे रही है, वहीं दूसरी ओर सादगी, आत्मनिर्भरता और जिम्मेदार नागरिकता का भी उदाहरण प्रस्तुत कर रही है। डॉ. राजशेखर का संकल्प है कि सेवानिवृत्ति तक वे अपने आवास से कार्यालय का सफर साइकिल से ही तय करेंगे।


