जमशेदपुर : झारखंड के युवा कारोबारी और होटल व्यवसायी निखार सबलोक हत्याकांड की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, कानून की कड़ाई और रसूखदारों की पहुंच के बीच का अंतर एक बार फिर सवालों के घेरे में है। चांडिल थाना क्षेत्र स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग के होटल ‘टेंथ माइल स्टोन’ में हुई ताबड़तोड़ फायरिंग और निर्मम हत्या के मामले में हिरासत में लिए गए मुख्य संदिग्धों की खातिरदारी को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं।
मामले में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब चार दिनों से पुलिस हिरासत और पूछताछ के दायरे में चल रहे सोनारी निवासी संदिग्ध अशोक सिंह राघव की तबीयत अचानक बिगड़ गई। सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान स्वास्थ्य संबंधी समस्या (रक्त की उल्टी) होने पर नियमतः उसे सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में भर्ती कराया जाना चाहिए था। उसे प्राथमिक तौर पर एमजीएम ले भी जाया गया, लेकिन चंद घंटों के भीतर ही आनन-फानन में उसे शहर के प्रतिष्ठित और महंगे निजी अस्पताल टाटा मेन हॉस्पिटल में रेफर और भर्ती करा दिया गया।
क्या ‘पैसों और पैरवी’ के बल पर बदल रहे कस्टडी के कायदे?
आम अपराधियों के लिए सरकारी अस्पताल के वार्ड और सख्त पहरा ही नियति होती है, लेकिन इस हाई-प्रोफाइल हत्याकांड में संदिग्ध को टीएमएच के आरामदायक माहौल में शिफ्ट किए जाने के बाद पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय चर्चाओं और प्रशासनिक गलियारों में यह बात जोर पकड़ रही है कि मामले के तार बड़े जमीन कारोबारियों, गिरोहों और रसूखदार सफेदपोशों से जुड़े होने के कारण कस्टडी के दौरान ‘पैरवी और पैसों की बरसात’ शुरू हो चुकी है। पुलिस महकमे की चुप्पी और संदिग्ध के निजी अस्पताल में भर्ती होने की घटना ने जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
10 लाख में सुपारी किलिंग और शूटरों की गिरफ्तारी
मामले में पुलिस की जांच में यह साफ हो चुका है कि निखार सबलोक की हत्या एक सोची-समझी सुपारी किलिंग थी। हत्या का सौदा लगभग 10 लाख रुपये में हुआ था। पुलिस ने बिहार से भाड़े के शूटरों को हिरासत में लिया है, जो वारदात के बाद लाल रंग की कार से फरार हुए थे।
साजिश की कड़ी और जमीन विवाद
पुलिस ने मामले के मुख्य साजिशकर्ता का मोबाइल जब्त कर पूरे मामले की कड़ी जोड़ ली है। हत्या के पीछे करोड़ों की विवादित जमीन की डील और गैंगस्टर अखिलेश सिंह गुट तथा उसके विरोधियों की आपसी रंजिश के तार जुड़ते दिख रहे हैं।
18 सदस्यीय एसआईटी की कार्रवाई
पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां जिले की संयुक्त 18 सदस्यीय एसआईटी टीम मामले की जांच कर रही है। बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में पुलिस की टीमें लगातार छापामारी कर रही हैं।
रेकी और प्लान-बी के तहत हत्या
शूटरों ने पहले निखार के कदमा स्थित विजया हेरिटेज आवास के पास हमले का प्लान बनाया था, लेकिन कड़ी सुरक्षा के कारण वे हाईवे स्थित होटल टेंथ माइल स्टोन पहुंचे। वहां मौका मिलते ही अपराधियों ने करीब 12 गोलियां मारकर निखार की हत्या कर दी।
संदेह के घेरे में कई नाम
मानगो के सिंटू सिंह समेत सोनारी और जमशेदपुर के कुछ अन्य व्यवसायियों के नाम सामने आए हैं, जिन्होंने शूटरों को स्थानीय स्तर पर शरण देने और रेकी कराने में भूमिका निभाई थी। जहाँ एक तरफ पुलिस जल्द ही पूरे घटनाक्रम का आधिकारिक खुलासा करने का दावा कर रही है, वहीं हिरासत में लिए गए संदिग्धों को मिल रही वीआईपी सहूलियतें जांच की मंशा पर सवालिया निशान लगा रही हैं।


