साहिबगंज। आदिम जनजाति बच्ची की मलेरिया से मौत के मामले में डॉक्टरों पर कार्रवाई के मामला में झासा ने 4 अक्टूबर से राज्यव्यापी आंदोलन की घोषणा के बाद मंगलवार को उपायुक्त हेमंत सती ने इस पूरे विश्लेषण में लिए गए कई फैसले को वापस ले लिया है। मिली जानकारी के अनुसार उन्होंने सदर अस्पताल को नोडल पदाधिकारी को भी मुक्त कर दिया है। वहीं सिविल सर्जन के वेतन निकासी पर लगाई गई रोक हटाते हुए डॉक्टरों के वेतन भुगतान पर डीडीसी के प्रतिहस्ताक्षर वाले आदेश को भी निरस्त कर दिया है।
क्या है पूरा मामला
9 सितंबर को आदिम जनजाति बच्ची की कथित मलेरिया से मौत के मामले में डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगा था। डीसी हेमंत सती ने सिविल सर्जन डॉ प्रवीण कुमार संथालिया के वेतन पर रोक लगा दी। इसके बाद डॉक्टर्स पर भी प्रशासनिक कार्रवाई करने की बात सामने आई। 16 सितंबर से डॉक्टरों ने प्रशासनिक कार्रवाई के विरोध में आंदोलन शुरू कर दिया। पहले दो दिन ज़िले के डॉक्टरों ने काला बिल्ला लगा कर काम किया। फिर 18 सितंबर से डॉक्टरों ने अस्पतालों में ओपीडी सेवा ठप कर दी। ओपीडी सेवा 7 दिनों तक ठप रही। लोगों को इमरजेंसी में इलाज हुआ। इधर रांची में स्वास्थ्य मंत्री, प्रधान सचिव व आईएमए व झासा के बीच कई प्रस्तावों पर वार्ता हुई है। स्वास्थ्य मंत्री ने उपायुक्त से वार्ता के बाद राज्य झासा के निर्देश पर जनहित को ध्यान में रखते हुए 26 सितंबर से ओपीडी सेवा बाहाल कर दी गई । उस समय झासा ने 30 सितंबर को स्थिति की समीक्षा कर आगे का निर्णय लेने की बात कही थी। वहीं मामले की समीक्षा के बाद स्थिति को यथावत बता झासा ने 30 सितंबर को स्वास्थ्य सचिव को पत्र लिखकर 4 अक्टूबर से राज्यव्यापी आंदोलन का एलान कर दिया था। इधर झासा ने अभी तक इस मामले में आंदोलन को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की है।


