चेन्नई । देश में इंजीनियरिंग और तकनीकी शिक्षा के प्रति छात्रों का रुझान लगातार कम हो रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार करीब 1 लाख 6 हजार इंजीनियरिंग सीटों पर दाखिला नहीं हो सका, जबकि कई संस्थानों में सीटें खाली रहने से उनके संचालन पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि देश में 93 इंजीनियरिंग कॉलेज बंद हो चुके हैं। इसके अलावा इंजीनियरिंग और तकनीकी संस्थानों में संचालित करीब 950 कोर्स भी बंद किए गए हैं। इसका प्रमुख कारण पर्याप्त संख्या में विद्यार्थियों का दाखिले के लिए उपलब्ध नही हैं।
तमिलनाडु में स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है। राज्य के 23 इंजीनियरिंग कॉलेजों में एक भी विद्यार्थी ने दाखिला नहीं लिया, यानी इन संस्थानों में दाखिला संख्या शून्य रही। यह स्थिति इंजीनियरिंग शिक्षा की गुणवत्ता, रोजगार के अवसरों और पारंपरिक इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों की उपयोगिता को लेकर छात्रों की बदलती प्राथमिकताओं को दर्शाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार तकनीकी शिक्षा में अब केवल डिग्री हासिल करना पर्याप्त नहीं रह गया है। विद्यार्थी रोजगार की संभावनाओं, उद्योग की मांग, आधुनिक तकनीक और कौशल आधारित पाठ्यक्रमों को अधिक महत्व दे रहे हैं। ऐसे में इंजीनियरिंग संस्थानों को पाठ्यक्रमों में बदलाव, उद्योग से जुड़ाव और रोजगारपरक प्रशिक्षण पर ध्यान देना होगा।
उच्च शिक्षा को लेकर छात्रों में रुझान कम होता चला जा रहा है। भारी फीस तथा डिग्री मिलने के बाद रोजगार नहीं मिलना सबसे बड़ी समस्या है। उच्च शिक्षा के लिए छात्र बैंक से कर्ज लेते हैं नौकरी नहीं मिलने के कारण वह कर्ज भी नहीं चुका पाते हैं जिसके कारण अब युवाओं का मोह उच्च शिक्षा से खत्म होता चला जा रहा है।


