केशव को अध्यक्ष बनाकर कांग्रेस ने खेला कुर्मी कार्ड
रामेश्वर उरांव बने कांग्रेस के आदिवासी चेहरा
चंदन मिश्र
झारखंड में विधानसभा चुनाव दस्तक दे रहा है। राजनीतिक दलों के अंदर उठा – पटक शुरू हो चुकी है। ऐन चुनाव के पहले कांग्रेस पार्टी ने प्रदेश में अपना नेतृत्व बदल कर बहुत बड़ा दांव खेला है। सिल्ली के पूर्व विधायक और बिहार सरकार के पूर्व उप मंत्री केशव महतो कमलेश नए अध्यक्ष नियुक्त किए गए हैं। वह राजेश ठाकुर की जगह लेंगे। कमलेश जमीन से जुड़े कार्यकर्ता रहे हैं। पार्टी के विभिन्न पदों पर रहते हुए आज वह प्रदेश की कमान संभालेंगे। एक शिक्षित, शालीन और अच्छे वक्ता के रूप में उनकी पहचान है। कमलेश स्नातकोत्तर तक शिक्षित हैं। ऊर्जावान और सक्रियता, कमलेश की विशेष पहचान है। केशव महतो कमलेश झारखंड की कुर्मी जाति से आते हैं। कुर्मी राजनीतिक तौर पर सूबे की सबसे सक्रिय जाति मानी जाती है। चुनावी राजनीति के लिहाज से कुर्मी समुदाय को झारखंड का एक बड़ा वोट बैंक माना जाता है। चुनाव के समय हर राजनीतिक दल इस वोट बैंक को अपने पाले में करने की जुगत में लगा रहता है। इसी मसले को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस ने झारखंड बनने के बाद पहली बार किसी कुर्मी जाति के नेता को पार्टी की कमान सौंपने का फैसला लिया है। केशव महतो कमलेश के अध्यक्ष बनने के पहले तक राज्य में दस अध्यक्ष बने, जिनमें दो अध्यक्ष अजय कुमार और राजेश ठाकुर को छोड़कर शेष सभी अध्यक्ष आदिवासी नेता ही बनाए गए। चुनाव के ठीक पहले कमलेश को पार्टी की कमान सौंपकर कांग्रेस नेतृत्व ने उनसे बड़ी उम्मीदें रखी हैं। 2019 के विधानसभा चुनाव के समय डॉ रामेश्वर उरांव प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष थे। उस चुनाव में कांग्रेस ने बेहतर परिणाम पाए थे, जिसका श्रेय डॉ रामेश्वर उरांव को ही जाता है। इस बार यह चुनौती नए अध्यक्ष केशव महतो कमलेश के सामने है कि कैसे कांग्रेस पार्टी बेहतर परिणाम लेकर आए।
रामेश्वर उरांव के नेता का चुनाव उचित
कांग्रेस विधायक दल के नेता आलमगीर आलम के जेल जाने के बाद यह पद खाली हो गया था। तब से कयास लगाया जा रहा था कि फलां विधायक को इसकी जिम्मेवारी सौंपी जाएगी। अलग-अलग नाम लिए जा रहे थे। इन नामों में रामेश्वर उरांव का नाम एक बार भी नहीं लिया गया। जबकि कांग्रेस के सभी विधायकों में रामेश्वर उरांव सबसे वरिष्ठ, शिक्षित और अनुभवी राजनेता हैं। लेकिन दल के अंदर गुटबंदी के कारण उन्हें चर्चा में नहीं रखा गया था। लेकिन कांग्रेस आलाकमान ने सही फैसला लेकर एक वरिष्ठ आदिवासी नेता को विधायक दल का नेता बनाकर आदिवासी वोटरों को भी साधने का जुगत भी बिठा लिया है। अब देखना है कि चुनाव में कांग्रेस की यह महतो और उरांव की जोड़ी क्या गुल खिलाती है।
विवादों में रहे राजेश ठाकुर
राजेश ठाकुर पिछले तीन सालों से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद पर काबिज थे। अपने पूरे कार्यकाल के दौरान राजेश ठाकुर कई बड़े फैसले लिए थे। कई मामलों में वह विवादों में भी रहे। एक ऐसी जाति का वह प्रतिनिधित्व करते हैं, जिस जाति के वोटर कांग्रेस के नहीं माने जाते हैं। फिर भी तीन सालों तक राजेश ठाकुर पार्टी का नेतृत्व करते रहे। कई बार उनके खिलाफ पार्टी विधायकों और वरिष्ठ नेताओं ने मोर्चा खोला और नेतृत्व से उन्हें हटाने की भी मांग की। बार-बार हटने और हटाने की चर्चा के बीच राजेश ठाकुर जमे रहे। अंतत: राजेश ठाकुर पद से हटाए गए।


