नई दिल्ली । देश भर में ई-20 पेट्रोल के इस्तेमाल को लेकर जारी बहस के बीच, पुरानी गाड़ियों के मालिकों के लिए राहत भरी खबर आई है। मोदी सरकार और तेल उद्योग के बीच बातचीत शुरू हो गई है, जिसमें ई-20 के साथ-साथ ई-10 पेट्रोल को भी बाजार में उपलब्ध कराने की संभावना पर विचार हो रहा है। हालांकि, यह चर्चा अभी शुरुआती दौर में है और इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
दरअसल आम लोगों की शिकायत है कि ई-20 ईंधन से गाड़ियों का माइलेज कम हुआ है और इंजन के पुर्जे खराब हो रहे हैं। हालांकि केंद्र सरकार लगातार इसके फायदे गिनाती रही है, जैसे आयातित ईंधन पर निर्भरता कम होना, प्रदूषण में कमी और किसानों की आय में वृद्धि होना प्रमुख फायदा है।लेकिन मोदी सरकार ने संसद में माना है कि पुराने वाहनों में ई-20 के इस्तेमाल से माइलेज में अधिकतम 3 से 6 फीसदी तक की कमी आ सकती है और रबर कंपोनेंट पर असर पड़ सकता है।
भारत ने बीते साल निर्धारित लक्ष्य से पांच साल पहले पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य हासिल किया था, जिसके बाद देशभर में ई-20 को बेस फ्यूल के तौर पर अपनाया गया। लेकिन इसके साथ ही उन करोड़ों पुराने वाहनों को लेकर सवाल खड़े हो गए, जिन्हें इतने उच्च इथेनॉल मिश्रण के लिए डिज़ाइन नहीं किया गया था। फिलहाल वाहन मालिकों के पास अपनी गाड़ियों के लिए पेट्रोल चुनने का कोई विकल्प नहीं है। यदि कोई चालक ई-10 का उपयोग करना चाहता है, या उसकी पुरानी कार या बाइक ई-10 के लिए प्रमाणित है, तब उसके पास मौजूदा समय में कोई दूसरा विकल्प मौजूद नहीं है।
इस मुद्दे को तब और बल मिला जब भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने अपने लेख में ई-10 को ई-20 के साथ उपलब्ध कराने का सुझाव दिया, जिसमें उन्होंने करोड़ों पुराने वाहनों में माइलेज गिरने और इंजन कंपोनेंट खराब होने की आशंका व्यक्त की थी। इस लेख के प्रकाशित होने के बाद ई-10 की वापसी पर चर्चा तेज हो गई।
ऑटो इंडस्ट्री के अनुसार, अप्रैल 2023 के बाद बनी और बिकी पेट्रोल गाड़ियां ई-20 के लिए पूरी तरह से तैयार हैं, क्योंकि केंद्र सरकार ने बीएस-6 फेज-2 इमिशन नियमों के तहत ई-20 कंप्लायंस को अनिवार्य किया था। हालांकि, अप्रैल 2023 से पहले बिक चुकी ज्यादातर गाड़ियां मिश्रण के लिए अनुकूल नहीं हैं। इसके बाद कई वाहन मालिक हैं जिनकी गाड़ियां अभी केवल 3-4 साल पुरानी हैं और उन्हें अभी कई वर्षों तक चलना बाकी है, जिनके लिए ई-20 ईंधन चिंता का विषय बना हुआ है।
सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि मोदी सरकार और इंडस्ट्री बॉडी के बीच चल रही इन चर्चाओं में तकनीकी और गैर-तकनीकी दोनों पहलुओं पर विचार हो रहा है। हालांकि, अभी यह बातचीत शुरुआती दौर में है और कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है, लेकिन उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में पुरानी गाड़ियों के मालिकों को ई-10 का विकल्प मिल सकता है।


