चंदन मिश्र
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवम सांसद आदित्य साहू ने अपनी नई कमिटी का गठन कर लिया है। अध्यक्ष ने शनिवार को प्रदेश पदाधिकारियों के नामों की घोषणा कर दी। नई टीम में अनुभवी और युवा चेहरों को समाहित किया गया है। घोषित टीम में 9 उपाध्यक्ष,तीन महामंत्री और नौ मंत्री बनाए गए हैं। दीपक बंका को फिर से कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। हेमंत दास को दुबारा कार्यालय मंत्री बनाया गया है। नई टीम में प्रदेश के लगभग हर प्रमंडल, जाति और समुदाय को तवज्जो दी गई है। अगड़ा, पिछड़ा, के साथ-साथ अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति को भी टीम में स्थान मिला है।
अध्यक्ष आदित्य साहु ने महामंत्री के पद पर अनुभवी चेहरा गणेश मिश्र, युवा चेहरा अमर कुमार बाउरी और मनोज सिंह को स्थान दिया है। धनबाद निवासी गणेश मिश्र ब्राह्मण हैं तो बोकारो चंदनकियारी के रहनेवाले अमर कुमार बाउरी अनुसूचित जाति का प्रतिनिधित्व करते हैं। मनोज सिंह राजपूत जाति के हैं और पलामू से आते हैं। उपाध्यक्ष पद पर नौ लोगों को स्थान मिला है। अभी तक पूरी कमिटी में चार महिलाओं को जगह मिली है।
नौ उपाध्यक्षों में अध्यक्ष आदित्य साहु ने तीन अनुसूचित जनजाति, जिसमें एक महिला (गीता कोड़ा) शामिल किया है। राकेश प्रसाद वरिष्ठ नेता हैं और अनुसूचित जाति से आते हैं। बाल मुकुंद सहाय और भानु प्रताप साही अगड़ी जाति से आते हैं, वहीं आभा महतो (महिला) समेत तीन पिछड़ी जाति से शामिल किए गए हैं। आभा महतो कुर्मी जाति का प्रतिनिधित्व करती हैं। वह जमशेदपुर से तीन बार सांसद भी रह चुकी हैं। कुर्मी समुदाय को आकर्षित करने के लिए पार्टी ने बड़ा दांव खेला है। उनके पति शैलेंद्र महतो पूर्व सांसद और नामचीन राजनीतिज्ञ रहे हैं। प्रदीप वर्मा राज्यसभा के सदस्य हैं और पिछली कमिटी में महामंत्री का दायित्व संभाल रहे थे, अब उपाध्यक्ष होंगे।
मंत्री के नौ पदों पर सभी जाति, समुदाय और क्षेत्र का ध्यान रखा गया है। अगड़ी और पिछड़ी जाति के साथ-साथ इसमें जनजाति समुदाय को भी जगह मिली है। इनमें कुछ पुराने और अधिकतर नए चेहरे शामिल किए गए हैं। पूरी कमिटी पर नजर डालें तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि राज्य के सभी जिलों का प्रतिनिधित्व करने वाले नेता टीम आदित्य साहु को अपने अनुभव का लाभ देने के साथ युवा साथी पूरे उत्साह से संगठन में जान फूंकने की कोशिश करेंगे। झारखंड में अपने मुख्य प्रतिद्वंद्वी झामुमो से राजनीतिक लड़ाई लड़ने के लिए भाजपा की नई टीम को काफी परिश्रम करना पड़ेगा। सड़क पर उतर कर संघर्ष करना पड़ेगा वरना झामुमो से राजनीतिक लड़ाई जीतना संभव नहीं होगा।
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