धरातल से गायब नाडेप और शोकपीट का निर्माण, लाखों-करोड़ों की सरकारी राशि की हो रही बंदरबांट
एस.के. झा. ‘सुमन’
दुमका। जिले के जामा प्रखंड से भ्रष्टाचार का एक बड़ा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां ‘संताल एक्सप्रेस’ अखबार में 11 जून 2025 को छपी खबर का एक बहुत बड़ा और निर्णायक असर देखने को मिला है। समाचार पत्र द्वारा “धरातल से गायब नाडेप और शोकपीट का निर्माण, लाखों-करोड़ों की सरकारी राशि की हो रही बंदरबांट” शीर्षक से प्रमुखता से प्रकाशित की गई खबर के बाद आखिरकार जिला प्रशासन की नींद टूटी है और इस पूरे महाघोटाले पर अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की गई है।
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जामा घोटाला: 4 सखी मंडलों को अल्टीमेटम, 30 मई तक पैसे लौटाएं या जाएं जेल
जिले के जामा प्रखंड में सॉकपिट और नाडेप निर्माण के नाम पर सरकारी राशि की कथित बंदरबांट का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। जिला प्रशासन ने प्रारंभिक जांच के बाद चार स्वयं सहायता समूहों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए कुल 13,36,778 की राशि वापस करने का नोटिस जारी किया है। प्रशासन ने साफ चेतावनी दी है कि 30 मई तक राशि जमा नहीं होने पर संबंधित समूहों के अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाएगी तथा समूहों को ब्लैकलिस्ट भी किया जाएगा।
यह मामला केंद्र एवं झारखंड सरकार की ग्रामीण स्वच्छता योजना से जुड़ा है, जिसके तहत गांवों में सॉकपिट और नाडेप (जैविक खाद निर्माण संरचना) का निर्माण कराया जाता है। आरोप है कि कई जगहों पर बिना निर्माण कार्य कराए ही सरकारी राशि की निकासी कर ली गई।
घोटाले का खुलासा 16 मई 2025 को तब हुआ, जब जामा प्रखंड के भनोरिया गांव के ग्राम प्रधान मरांडी हेंब्रम एवं लखना गांव की जल सहिया मरियम टुडू ने ग्रामीणों के साथ मिलकर उपायुक्त को शिकायत सौंपी। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि आधार कार्ड के जरिए भुगतान दिखाकर राशि निकाल ली गई, जबकि जमीन पर कोई निर्माण कार्य नहीं हुआ। शिकायत में प्रखंड कार्यालय जामा एवं पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल संख्या-2 के अधिकारियों की मिलीभगत का भी आरोप लगाया गया।
प्रशासन द्वारा कराई गई प्रारंभिक जांच में चार स्वयं सहायता समूहों द्वारा अनियमित निकासी की पुष्टि होने के बाद वसूली नोटिस जारी किया गया। कार्यपालक अभियंता रमेश कुमार महतो ने कहा कि सभी पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा, जिसके बाद आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
जिन समूहों पर राशि वसूली का नोटिस जारी हुआ है, उनमें कन्हैया आजीविका सखी मंडल, जरमुंडी पर 2,05,569, न्यू स्वयं सहायता समूह, सहजो पर 1,76,392, क्रिया स्वयं सहायता समूह पर 43,980 तथा गंगा स्वयं सहायता समूह, जामगढ़, जामा पर 9,10,837 की राशि बकाया बताई गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते जांच नहीं होती, तो सरकारी योजनाओं की राशि इसी तरह फर्जी निर्माण कार्यों के नाम पर हड़पी जाती रहती। अब प्रशासन की कार्रवाई से क्षेत्र में हड़कंप मचा हुआ है और लोग दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।


