मुंबई । केंद्रीय मंत्री एवं ‘रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले)’ के प्रमुख रामदास आठवले ने आरक्षण का विरोध करने वालों या इसे खत्म करने की मांग करने वालों के खिलाफ राजद्रोह का मामला दर्ज करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि आरक्षण संवैधानिक अधिकार है।
आठवले ने कहा कि आरक्षण के खिलाफ प्रदर्शन ने इस मुद्दे को फिर से चर्चा में ला दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर भी आरक्षण व्यवस्था को खत्म करने या उसमें बदलाव की मांग को लेकर अभियान चलाए जा रहे हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक आठवले ने कहा कि आरक्षण का विरोध संविधान का विरोध है, जो लोग आरक्षण-विरोधी रुख अपनाते हैं, वे संविधान-विरोधी हैं और उनके खिलाफ राजद्रोह के तहत कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि कुछ लोग आरक्षण खत्म करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन इसे समाप्त नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह संविधान प्रदत्त अधिकार है। इससे पहले 22 अगस्त को केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने कहा था कि आरक्षण ‘संवैधानिक अधिकार’ है और इसे खत्म करने की मांग को उन्होंने ‘असंवैधानिक’ बताया था।
पटना में आठवले ने कहा कि कुछ लोग आरक्षण समाप्त करने की मांग कर रहे हैं, जबकि कुछ अन्य ने इसके खिलाफ सोशल मीडिया कुछ लोगों ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करते हुए आरक्षण खत्म करने की मांग की, जबकि कुछ अन्य ने सोशल मीडिया पर अभियान चलाकर इसे समाप्त करने की बात कही, लेकिन आरक्षण को खत्म नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह हमारा संवैधानिक अधिकार है। आठवले ने कहा कि आरक्षण का विस्तार एससी और एसटी से लेकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) तक हुआ है। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था को खत्म करने की मांग का कोई औचित्य नहीं है, क्योंकि सभी जरूरतमंद वर्गों को इसका लाभ मिल रहा है।


