विधानसभा परिसर में अंबेडकर और शिबू सोरेन की प्रतिमा लगे : सुरेश पासवान
रांची। झारखंड विधानसभा में बजट पर चर्चा के दौरान देवघर विधायक सुरेश पासवान ने सरकार के पक्ष में बोलते हुए कटौती प्रस्ताव का विरोध किया और कई मुद्दे उठाए। उन्होंने विधानसभा परिसर में बाबा अंबेडकर और शिबू सोरेन की प्रतिमा लगाने की मांग की। उन्होंने कहा कि राज्य गठन आंदोलन में आंदोलनकारियों का बड़ा योगदान रहा है, इसलिए उनकी विरासत का सम्मान होना चाहिए। पासवान ने विस्थापित परिवारों को मिली जमीन का म्यूटेशन कर जल्द रसीद देने, खाली प्रशासनिक पदों को भरने और पीडब्ल्यूडी में कार्यरत एससी इंजीनियरों को पदोन्नति देने की मांग की। उन्होंने जसीडीह क्षेत्र में उद्योग बंद होने के बाद किसानों की जमीन वापस दिलाने की बात कही। साथ ही मोहनपुर में अंबेडकर के नाम पर पॉलिटेक्निक कॉलेज और सावित्री फुले के नाम पर पुस्तकालय खोलने की मांग की।
देवघर में रैयतों की जमीन वापस कराई जाएं : सुरेश
झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान देवघर विधायक सुरेश पासवान ने रैयतों की जमीन वापस कराने का मुद्दा सदन में उठाया। उन्होंने अध्यक्ष के माध्यम से सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि देवघर जिले के चांदपुर मौजा में रैयतों की जमीन 50 वर्षों के लिए डाबर इंडिया लिमिटेड को दी गई थी। यह अवधि वर्ष 2013 में समाप्त हो चुकी है। विधायक ने कहा कि इस मामले में झारखंड उच्च न्यायालय के आदेश में कानून के अनुसार रैयतों को उनकी जमीन वापस करने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद अब तक रैयतों को जमीन वापस नहीं की गई है। सुरेश पासवान ने कहा कि जमीन नहीं मिलने के कारण कई रैयतों की स्थिति बेहद खराब हो गई है और वे भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि अदालत के आदेश का पालन करते हुए रैयतों को जल्द से जल्द उनकी जमीन वापस दिलाई जाए, ताकि प्रभावित परिवारों को राहत मिल सके।
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मतदाता सूची, ओबीसी आरक्षण और जातीय जनगणना पर प्रदीप यादव ने जताई चिंता
रांची। झारखंड विधानसभा के बजट सत्र में विधायक प्रदीप यादव ने कई महत्वपूर्ण जनहित के मुद्दे उठाते हुए सरकार का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने मतदाता सूची से नाम हटाने, ओबीसी आरक्षण, जातीय जनगणना और स्थानीय युवाओं के रोजगार जैसे विषयों पर चिंता जताई। प्रदीप यादव ने कहा कि देश के कई राज्यों में बड़ी संख्या में लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। उनके अनुसार बिहार में करीब 65 लाख और अन्य राज्यों में लगभग एक करोड़ लोगों के नाम हटाए गए हैं। झारखंड में भी पैरेंटल मैपिंग के नाम पर करीब 12 लाख नाम काटे जाने का दावा करते हुए उन्होंने कहा कि इससे आदिवासी, दलित, पिछड़े और मुस्लिम समुदाय अधिक प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने दुमका में चौकीदार बहाली का उदाहरण देते हुए ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने की मांग की। साथ ही राज्य में जातीय जनगणना कराने, 75 प्रतिशत स्थानीय नियोजन कानून को लागू करने और भूमिहीनों को निवास प्रमाण पत्र देने की मांग भी की।
डीएमएफटी फंड के उपयोग पर उठाए सवाल
रांची। झारखंड विधानसभा में खनन क्षेत्रों के विकास और जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) फंड के उपयोग को लेकर चर्चा के दौरान विधायक प्रदीप यादव ने खान एवं भूतत्व विभाग से कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए। सदन में उन्होंने पूछा कि क्या भारत सरकार के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार खनन क्षेत्र के 30 किलोमीटर के दायरे में ही डीएमएफटी फंड से विकास कार्य करने का प्रावधान तय किया गया है। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था के कारण फंड का उपयोग जिले के कुछ सीमित इलाकों में ही हो पाता है। प्रदीप यादव ने कहा कि खनन गतिविधियों से प्रभावित कई अन्य क्षेत्रों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है, जिससे विकास में क्षेत्रीय असंतुलन पैदा हो रहा है। उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या समावेशी और संतुलित विकास सुनिश्चित करने के लिए कोई नई योजना या नीति बनाने पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि खनन से प्रभावित सभी क्षेत्रों तक विकास योजनाओं का लाभ पहुंचाना जरूरी है।
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जामा विधायक डॉ. लुईस मरांडी ने 50 बेड अस्पताल शुरू कराने का मुद्दा उठाया
रांची। झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान शून्यकाल में जामा विधानसभा क्षेत्र की विधायक डॉ. लुईस मरांडी ने रामगढ़ प्रखंड के कदविंदा में बने 50 बेड के अस्पताल भवन का मुद्दा उठाया। उन्होंने सदन को बताया कि कदविंदा में 50 बेड का अस्पताल भवन बनकर तैयार है, लेकिन अब तक उसका उपयोग शुरू नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि अस्पताल का संचालन जनहित में अत्यंत आवश्यक है। विधायक ने कहा कि अस्पताल शुरू होने से आसपास के लगभग 100 से अधिक गांवों के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिल सकेगी और उन्हें इलाज के लिए दूर-दराज के शहरों में नहीं जाना पड़ेगा। डॉ. लुईस मरांडी ने सरकार से मांग की कि जनहित को ध्यान में रखते हुए कदविंदा स्थित 50 बेड अस्पताल को जल्द से जल्द चालू कराया जाए, ताकि क्षेत्र के लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल सके।
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टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के लैब टेक्नीशियनों को नियमितीकरण किया जाएं : एमटी राजा
रांची। राजमहल विधायक मोहम्मद ताजमुद्दीन ने स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत लैब टेक्नीशियनों के नियमितीकरण की मांग की। उन्होंने कहा कि झारखंड स्वास्थ्य विभाग में पिछले 20-25 वर्षों से टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के तहत कई लैब टेक्नीशियन कार्यरत हैं, लेकिन अब तक उनके नियमितीकरण की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। विधायक ने बताया कि इन कर्मियों को पीएफ, पेंशन, वेतन मैट्रिक्स, चिकित्सा अवकाश और अन्य मूलभूत सुविधाएं भी नहीं मिल रही हैं, जिससे उन्हें लंबे समय से कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। मोहम्मद ताजमुद्दीन ने सरकार से मांग की कि स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत इन लैब टेक्नीशियनों के लिए स्पष्ट नियम और नीति बनाकर उनका नियमितीकरण किया जाए तथा उन्हें उचित वेतनमान और अन्य आवश्यक सुविधाएं प्रदान की जाएं।
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विधायक धनंजय सोरेन ने सड़क और बिजली की मांग उठाई
रांची। झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान बोरियो विधायक धनंजय सोरेन ने साहिबगंज जिले के एक गांव में बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा सदन में उठाया। उन्होंने बताया कि साहिबगंज जिले के बोरियो प्रखंड अंतर्गत तेरीयापाड़ा पंचायत के दरभंगा संथाली गांव स्थित दरभंगा पहाड़ में लगभग 500 घर और करीब 2000 की आबादी निवास करती है। इसके बावजूद वहां अब तक सड़क और बिजली की सुविधा उपलब्ध नहीं है। विधायक ने कहा कि इन मूलभूत सुविधाओं के अभाव में गांव के लोग काफी कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि जनहित को ध्यान में रखते हुए दरभंगा पहाड़ गांव में जल्द से जल्द सड़क और बिजली की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि ग्रामीणों को राहत मिल सके।
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शिक्षकों की पदस्थापना पर सारठ विधायक उदय शंकर सिंह ने उठाए सवाल
रांची। झारखंड विधानसभा के बजट सत्र में सारठ विधायक उदय शंकर सिंह ने देवघर जिले के एक विद्यालय में शिक्षकों की पदस्थापना को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि विभागीय जानकारी के अनुसार वहां 18 शिक्षक कार्यरत बताए गए हैं, जिनमें 7 पीजीटी, 7 टीजीटी और 4 प्राथमिक शिक्षक शामिल हैं। उन्होंने पूछा कि क्या सभी शिक्षक वास्तव में वहां कार्यरत हैं। इस पर शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि विभाग ने स्पष्ट जवाब दिया है और स्कूल में छात्र-शिक्षक अनुपात के अनुसार स्थिति संतुलित है। उन्होंने बताया कि हाई स्कूल में 11 पद स्वीकृत हैं और पर्याप्त शिक्षक मौजूद हैं। फिर भी सदस्य की चिंता को देखते हुए मामले की समीक्षा की जाएगी।


