नई दिल्ली । देश में आगामी राज्यसभा चुनाव की दस्तक के साथ ही केंद्र की एनडीए सरकार में कैबिनेट फेरबदल की सुगबुगाहट काफी तेज हो गई है। राजनीतिक गलियारों में अटकलें हैं कि इस बार केंद्रीय मंत्रिपरिषद में बड़े स्तर पर बदलाव देखने को मिल सकते हैं, जिसमें कई राज्य मंत्रियों को बदला जा सकता है। हालांकि, अभी तक आधिकारिक रूप से यह साफ नहीं किया गया है कि किन मंत्रालयों में किस स्तर पर बदलाव होंगे, लेकिन सूत्रों का कहना है कि प्रभावित होने वाले मंत्रियों की संख्या एक दर्जन तक जा सकती है। यह सारी कवायद 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव के ठीक पहले देखी जा रही है।
उत्तर प्रदेश समेत कई अहम राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों में जुटी भारतीय जनता पार्टी इस फेरबदल को लेकर बड़े फैसले ले सकती है। सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि कम से कम 2 कैबिनेट मंत्री और 3 राज्य मंत्रियों को मंत्रिपरिषद से बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। इसके साथ ही यह भी चर्चा है कि एक वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री को दक्षिण भारतीय राज्य में पार्टी को मजबूत करने के लिए संगठन की कमान सौंपी जा सकती है। इस संभावित फेरबदल की सबसे खास बात यह है कि मोदी सरकार की नई कैबिनेट में सहयोगी दलों को तरजीह दी जा सकती है। चर्चाओं के अनुसार, जनता दल यूनाइटेड, तेलुगु देशम पार्टी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और आरएलएम जैसे प्रमुख सहयोगी दलों को सरकार में शामिल किया जा सकता है। इसमें नीतीश कुमार की जेडीयू और चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी को सबसे ज्यादा फायदा होने की उम्मीद जताई जा रही है, जबकि सहयोगी दलों के अधिकांश नेताओं को राज्य मंत्री का पद सौंपा जा सकता है।
बता दें कि 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव के तहत आंध्र प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, राजस्थान, झारखंड और पूर्वोत्तर के कई राज्यों की कुल 26 सीटों पर चुनाव और उपचुनाव होना है। इन सीटों में से 18 फिलहाल एनडीए के पास हैं, जिनमें अकेले भाजपा के पास 12 सीटें हैं। चुनावी समीकरणों को साधने के लिहाज से यह फेरबदल बेहद अहम माना जा रहा है। मंत्रिपरिषद में बदलाव के पीछे राज्यसभा चुनाव की एक बड़ी भूमिका मानी जा रही है। जिन मंत्रियों का राज्यसभा कार्यकाल पूरा हो रहा है, उन्हें संगठन में वापस भेजा जा सकता है। इसके अलावा, 70 वर्ष से अधिक आयु के कुछ राज्यसभा सांसदों की जगह नए और युवा चेहरों को मौका देने पर विचार चल रहा है। भाजपा के कुछ मोर्चा नेताओं को पहली बार कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है। फेरबदल के दायरे में रेलवे, वित्त, कॉर्पोरेट अफेयर्स, कोयला, सूचना एवं प्रसारण, आईटी, ग्रामीण विकास, कृषि और कानून जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय आ सकते हैं।


