◆28 जून 2025 की सिंडिकेट में आरोपी प्राचार्य एवं कर्मियों पर एफआईआर का हुआ था फैसला
◆सिंडिकेट की 26 सितंबर 2025 की बैठक में पलट दिया गया था फैसला, अब कुलपति से मांगा गया निर्णय में बदलाव का कारण
संताल एक्सप्रेस संवाददाता
रांची/देवघर। देवघर कॉलेज में जैक फंड में कथित फर्जीवाड़ा और अवैध निकासी के तीन साल पुराने मामले में राज्यपाल सचिवालय ने सख्त रुख अपनाते हुए एसकेएमयू दुमका के कुलपति को आरोपी पदाधिकारियों एवं कर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई पूरी करने और दंडादेश पारित कर अनुपालन प्रतिवेदन भेजने का निर्देश दिया है।
इस मामले में सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय, दुमका के सिंडिकेट की दो बैठकों में फैसलों में हुए बदलाव को लेकर भी राज्यपाल सचिवालय ने गंभीर है। राज्यपाल सचिवालय ने विश्वविद्यालय के कुलपति से पूछा है कि 28 जून 2025 और 26 सितंबर 2025 को हुई सिंडिकेट की बैठकों में एक ही मामले को लेकर लिए गए निर्णयों में बदलाव क्यों किया गया।
राज्यपाल सचिवालय की ओर से अवर सचिव संजय कुमार द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि देवघर कॉलेज के जैक फंड में कथित वित्तीय गड़बड़ी कर अवैध निकासी के मामले में दोषी अधिकारियों एवं कर्मियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई संचालित करने का निर्देश पहले ही दिया गया था। इस संबंध में राज्यपाल सचिवालय ने 20 अप्रैल 2023 को भी विश्वविद्यालय को पत्र भेजा था।लेकिन विश्वविद्यालय ने अब तक विभागीय कार्रवाई का अंतिम निस्तारण नहीं किया है और न ही किसी प्रकार के दंड अधिरोपण की सूचना उपलब्ध कराई है।
विश्वविद्यालय सिंडिकेट की 28 जून 2025 को हुई बैठक की कार्यवाही के अनुसार, बैठक में 30 अप्रैल 2025 को आयोजित अनुशासन समिति की बैठक में लिए गए निर्णयों पर विचार किया गया था। इसमें देवघर कॉलेज के तत्कालीन प्राचार्य डॉ. बसंत कुमार गुप्ता, बर्सर डॉ. चंद्रशेखर आजाद और लेखापाल मयंक केश रंजन के विरुद्ध विश्वविद्यालय के कुलसचिव/कुलानुशासक के माध्यम से संबंधित थाना में एफआईआर दर्ज कराने का निर्णय लिया गया था। कार्यवाही में उक्त कर्मचारियों को निलंबित करने का निर्णय भी दर्ज है।
इसके बाद 26 सितंबर 2025 को आयोजित सिंडिकेट की बैठक में 28 जून 2025 की बैठक के कार्यसूची संख्या-4 में लिए गए निर्णय पर पुनर्विचार किया गया। कार्यवाही के अनुसार, राज्यपाल सचिवालय के 16 मार्च 2023 के पत्रांक 824 के आलोक में 30 अप्रैल 2025 की अनुशासन समिति की अनुशंसा तथा 28 जून 2025 के सिंडिकेट के निर्णय पर पुनर्विचार करते हुए बहुमत से इसे अमान्य करने का फैसला लिया गया।
इस फैसले के पीछे तर्क दिया गया कि देवघर कॉलेज के तत्कालीन प्राचार्य डॉ. बसंत कुमार गुप्ता, बर्सर डॉ. चंद्रशेखर आजाद और लेखापाल मयंक केश रंजन के विरुद्ध पूर्व में दंडात्मक कार्रवाई की जा चुकी है। इसलिए एक ही मामले में बार-बार दंडित नहीं किया जा सकता।
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सिंडिकेट के निर्णय की समीक्षा व बदलाव का अधिकार सिर्फ कुलाधिपति को है!
सूत्रों के अनुसार 26 सितंबर 2025 की बैठक की कार्यवाही में एक महत्वपूर्ण असहमति नोट भी दर्ज है। सिंडिकेट में राज्यपाल के नामित प्रतिनिधि डॉ. एस.एन. सिंह की ओर से दर्ज इस असहमति नोट में 28 जून 2025 के सिंडिकेट के सर्वसम्मत निर्णय को 26 सितंबर की बैठक में बदलने पर आपत्ति जताई गई है।
असहमति नोट में कहा गया है कि सिंडिकेट के सर्वसम्मत निर्णय की समीक्षा अथवा उसमें बदलाव करने का अधिकार केवल कुलाधिपति को है। इसमें यह भी उल्लेख किया गया है कि विश्वविद्यालय की ओर से अब तक कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की गई है। नोट में निर्णय को कुलाधिपति के भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति के विपरीत बताते हुए आशंका जताई गई है कि इससे विश्वविद्यालय में भविष्य में भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल सकता है।
एसकेएमयू के वीसी को राज्यपाल सचिवालय द्वारा भेजे गए ताजा पत्र में 28 जून 2025 और 26 सितंबर 2025 की सिंडिकेट बैठकों में निर्णयों में किए गए बदलाव के कारण भी स्पष्ट करने को कहा गया है।


