●नई दिल्ली में केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी से मुलाकात कर सौंपा ज्ञापन
●एनसीईआरटी की किताबों, शिक्षक मार्गदर्शिकाओं और डिजिटल सामग्री को ओलचिकी में तैयार करने का आग्रह
●कहा- ओलचिकी संताली की मूल एवं सर्वमान्य लिपि, भाषा की पहचान मजबूत करने के लिए जरूरी
नई दिल्ली। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने बुधवार को नई दिल्ली में केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी से मुलाकात कर संताली भाषा की पठन-पाठन सामग्री को ओलचिकी लिपि में प्रकाशित करने की मांग की। इस संबंध में उन्होंने केंद्रीय मंत्री को ज्ञापन सौंपकर एनसीईआरटी सहित शिक्षा मंत्रालय से जुड़ी संस्थाओं को आवश्यक निर्देश देने का आग्रह किया।
रघुवर दास ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री को बताया कि संताली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में स्थान प्राप्त है और संताली के लिए ओलचिकी लिपि का व्यापक स्तर पर प्रयोग किया जाता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में संताली भाषा की पुस्तकों को देवनागरी लिपि में तैयार करने पर विचार किया जा रहा है, जबकि संताली भाषी समाज की अपनी स्वीकृत लिपि ओलचिकी है।
उन्होंने वर्ष 2025 में मनाए गए ओलचिकी लिपि के शताब्दी वर्ष का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित शताब्दी समारोह के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों ओलचिकी लिपि में संताली में अनुवादित भारतीय संविधान का लोकार्पण किया गया था।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि हूल दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से भी ओलचिकी लिपि में संदेश जारी किया गया था। झारखंड के संताल बहुल क्षेत्रों में रेलवे स्टेशनों और विभिन्न कार्यालयों के नामपट्ट ओलचिकी लिपि में लिखे जाने तथा साहित्य अकादमी पुरस्कार में ओलचिकी के प्रयोग का भी उन्होंने उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि झारखंड के अलावा पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और असम सहित कई राज्यों के साथ नेपाल और बांग्लादेश में भी ओलचिकी का व्यापक इस्तेमाल होता है। ऐसे में संताली भाषा की पाठ्य पुस्तकों, संदर्भ सामग्री, शिक्षक मार्गदर्शिकाओं और डिजिटल संसाधनों को ओलचिकी में उपलब्ध कराना भाषा की पहचान और संरक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
रघुवर दास ने शिक्षा मंत्री से आग्रह किया कि एनसीईआरटी तथा शिक्षा मंत्रालय से संबंधित संस्थाओं को संताली भाषा की शैक्षणिक सामग्री मूल ओलचिकी लिपि में तैयार एवं प्रकाशित करने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। उन्होंने बताया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री के साथ इस मुद्दे पर बातचीत सकारात्मक रही।


