रांची । झारखंड में शिक्षा मंत्री का पद अब राजनीति में प्रचलित अंधविश्वास की कहानियों में शुमार हो गया है। लगातार तीसरे शिक्षा मंत्री की असामयिक मौत ने इस पद को लेकर गंभीर चर्चा और आशंकाएं पैदा कर दी हैं। पहले जगरनाथ महतो, फिर रामदास सोरेन और अब सुदिव्य सोनू के निधन ने सबको सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या इस पद के साथ कोई अशुभ जुड़ा है।
हेमंत सोरेन ने 2019 में जब भाजपा से सत्ता छीनी, तो उनकी सरकार में ‘टाइगर’ नाम से मशहूर जगरनाथ महतो को शिक्षा मंत्री बनाया गया था। कोविड महामारी के समय उनके फेफड़े संक्रमित हुए और 6 अप्रैल 2023 को उनका निधन हो गया। जगरनाथ महतो के बाद रामदास सोरेन को शिक्षा मंत्रालय का दायित्व सौंपा गया, लेकिन साल भर में ही वे भी चल बसे। इन दो मौतों के बाद पद पर बैठाने की बारी आई तो तीसरे शिक्षा मंत्री सुदिव्य सोनू को बनाया गया, जो हेमंत सोरेन सरकार के संकटमोचक और जेएमएम में भरोसेमंद नेता माने जाते थे। हाल ही में 6 सितंबर 2026 को उनका भी निधन हो गया, जिसने इस पद के इर्द-गिर्द अंधविश्वास की कहानियों को और बल दे दिया है।
यह सिर्फ झारखंड की बात नहीं, राजनीति में ऐसे कई अंधविश्वास प्रचलित हैं। बिहार में लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने अपने मंत्री आवास (3, देशरत्न मार्ग) को ‘भूतिया’ बता दिया था, जब महागठबंधन सरकार गिरने के बाद 2018 में उन्हें मंत्री पद छोड़ना पड़ा। उनका आरोप था कि भाजपा और नीतीश कुमार ने इस आवास में भूत भेज दिए हैं। पटना में 39, हार्डिंग रोड और स्ट्रैंड रोड का बंगला नंबर 6 जैसे कई अन्य सरकारी आवासों के बारे में भी यही धारणा रही है कि यहां रहने वाले मंत्री अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाते। उत्तर प्रदेश में भी नोएडा को लेकर राजनीतिकों के बीच ऐसा ही अंधविश्वास रहा कि जो भी मुख्यमंत्री वहां गया, उसकी कुर्सी चली गई। जून 1988 में वीर बहादुर सिंह, 1989 में एन.डी. तिवारी के बाद मुलायम सिंह यादव, मायावती और कल्याण सिंह के उदाहरण दिए जाते थे, जिनकी नोएडा दौरे के बाद सत्ता चली गई। इसी भय से 2012 से 2017 तक अखिलेश यादव मुख्यमंत्री रहते हुए नोएडा जाने की हिम्मत नहीं जुटा सके। हालांकि, योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री बनने के बाद बार-बार नोएडा का दौरा कर इस अंधविश्वास को ध्वस्त किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी जेवर एयरपोर्ट के उद्घाटन के दौरान इस बात का जिक्र किया था। अब झारखंड में अगले शिक्षा मंत्री के नाम को लेकर कयास तो लग रहे हैं, लेकिन लगातार तीसरी असामयिक मौत के बाद इसकी जिम्मेदारी लेने की हिम्मत कोई जुटा नहीं पा रहा है। चर्चा है कि इस बार कांग्रेस कोटे के किसी व्यक्ति को यह पद हेमंत दे सकते हैं, या यह भी कि यदि कोई तैयार नहीं हुआ तो हेमंत अपनी विधायक पत्नी कल्पना सोरेन को मंत्रिमंडल में शामिल कर उन्हें ही शिक्षा मंत्री बना सकते हैं।


