नई दिल्ली । उच्चतम न्यायालय ने झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) 2025 की परीक्षा में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र सीबीआई जांच की मांग पर झारखंड सरकार को नोटिस जारी किया है। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि झारखंड लोक सेवा आयोग ही ज्यूडिशियल सर्विस की परीक्षा लेता है। हमें तो उसकी चिंता हो रही है।
सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन ने दायर याचिका में मांग की है कि झारखंड लोक सेवा आयोग की 2025 परीक्षा में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र सीबीआई जांच की जाए। वकील सत्यम सिंह राजपूत के जरिए दायर याचिका में कहा गया है कि इस मामले की जांच झारखंड सीआईडी से हटाकर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपी जाए। याचिका में कहा गया है कि एक ऐसी जांच एजेंसी नियुक्त की जाए, जो राज्य सरकार के प्रभाव से मुक्त हो, ताकि आम लोगों का भरोसा कायम हो। ये विवाद 19 अप्रैल को झारखंड लोक सेवा आयोग की प्रीलिम्स परीक्षा से जुड़ा हुआ है। इसका रिजल्ट दो जुलाई को घोषित किया गया था। रिजल्ट घोषित होने के बाद एक अभ्यर्थी की ओएमआर शीट की प्रति वायरल हुईं थी, जिसमें उसने 100 में से मात्र 48 प्रश्नों को हल करने की कोशिश की और उसके बावजूद वो क्वालिफाई कर गया।
इस मामले में झारखंड लोक सेवा आयोग को इस बात के लिए भी आलोचना झेलनी पड़ रही थी कि उसने परीक्षा आयोजित करने के लिए टीएसडीपीएल का चयन किया था। टीएसडीपीएल को इस परीक्षा के कुछ महीने पहले ही झारखंड स्टाफ सेलेक्शन कमीशन ने अनियमितताओं की शिकायतों के बाद ब्लैकलिस्ट किया था।
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