मुम्बई । 15 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण करने वाले बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने जिस प्रकार से अब तक खेला है। इससे उनके प्रशंसकों की उम्मीदें भी बढ़ती जा रही हैं। अब प्रशंसकों को उम्मीद है कि वह वेस्टइंडीज के दिग्गज बल्लेबाज ब्रायन लारा का 400 रनों का विश्व रिकार्ड तोड़ सकते हैं। वैभव ने हालांकि अभी तक भारतीय टीम से केवल टी20 प्रारुप में ही खेला है पर जिस प्रकार की प्रतिभा उनमें पायी गयी है उससे तय है कि भविष्य में कई रिकार्ड तोड़ सकते हैं। उनकी प्रतिभा को देखते हुए टेस्ट और एकदिवसीय प्रारुपफॉर्मेट में भी उनके डेब्यू की चर्चाएं तेज हो गई हैं। अब वैभव लाल गेंद से खेली जाने वाली प्रतिष्ठित घरेलू प्रतियोगिता दिलीप ट्रॉफी में खेलते हुए दिखेंगे। वैभव का कहन है कि व भारतीय टीम के लिए टेस्ट प्रारुप में खेलना चाहते हैं और उसी दिशा में प्रयास कर रहे हैं।
वैभव के लिए हालांकि स्ट क्रिकेट में अपनरे को स्थापित करना इतना भी आसान नहीं होगा, क्योंकि यह प्रारूप संयम और धैर्य की कसौटी होता है। वैभव अभी तक जिस भी सीमित ओवरों के टूर्नामेंट में उतरे हैं, उन्होंने कोई न कोई रिकॉर्ड बनाया या तोड़ा है. ऐसे में अगर उन्हें टेस्ट क्रिकेट में खेलने का मौका मिलता है, तो उनके निशाने पर लारा का वह ऐतिहासिक रिकॉर्ड होगा। इस रिकार्ड को तोड़ने के इस ऐतिहासिक उपलब्धि को तोड़ने के लिए भारतीय टीम के पूर्व विस्फोटक सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग ने भी कई बार प्रयास किए, लेकिन वे कभी इसमें सफल नहीं हो पाए। वहीं क्रिकेट दिग्गजों का मानना है कि वैभव में वह असाधारण प्रतिभा है, जो लारा के टेस्ट क्रिकेट के इस सबसे बड़े व्यक्तिगत स्कोर के रिकॉर्ड को ध्वस्त कर सकती है.
आधुनिक क्रिकेट के टी20 प्रारूप में बल्लेबाजों के लिए शतक लगाना एक आम बात हो गई है, लेकिन इसके विपरीत टेस्ट क्रिकेट की बात करें तो इस फॉर्मेट में रन बनाने से कहीं ज्यादा बल्लेबाज का धैर्य और संयम मायने रखता है कि वह क्रीज पर कितनी देर टिका रहा। टेस्ट में टी20 के जैसे हर गेंद पर चौके और छक्के देखने को नहीं मिलते, बल्कि यहां एक-एक रन के लिए संघर्ष करना पड़ता है. यही कारण है कि टेस्ट में सिर्फ शतक ही नहीं, दोहरा और तिहरा शतक भी लगता है, लेकिन लाल गेंद के इस प्रारूप में लारा ने 400 रन के ऐतिहासिक आंकड़े को छूने का अद्भुत कारनामा किया है, जो आज भी एक मील का पत्थर है।


