पुरी । भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा की तिथियों को लेकर पुरी जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) और इस्कॉन (इस्कॉन) के बीच विवाद गहरा गया है। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर गलत बयानी का आरोप लगा रहे हैं, विशेषकर विदेशों में रथ यात्रा और अन्य जगन्नाथ संबंधित उत्सवों के बेवक्त आयोजन को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन ने इस्कॉन के उन दावे को पूरी तरह खारिज किया है, जिसमें रथ यात्रा को किसी भी दिन आयोजित करने को शास्त्रों के अनुकूल बताया गया था। एसजेटीए ने बयान में कहा कि इस्कॉन राष्ट्रीय संचार कार्यालय, नई दिल्ली द्वारा 12 जुलाई को जारी प्रेस रिलीज झूठे बयानों से भरी हुई है, जिसका उद्देश्य बेवक्त श्री जगन्नाथ रथ यात्रा के बारे में जनता को गुमराह करना है। मंदिर प्रशासन ने स्पष्ट किया कि विदेशों में रथ यात्रा बेवक्त मनाना शास्त्रों के विरुद्ध है।
इस विवाद को सुलझाने के लिए हाल ही में भुवनेश्वर में एसजेटीए और इस्कॉन के विद्वानों के बीच संयुक्त बैठक आयोजित की गई थी। उस बैठक में, इस्कॉन के विद्वानों ने विभिन्न तिथियों पर रथ यात्रा मनाने को सही ठहराने की कोशिश की, लेकिन पुरी मंदिर के विद्वानों ने प्रामाणिक शास्त्रों और पुराणों का सटीक संदर्भ देकर उनके सभी दावों को पूरी तरह से खारिज किया। एसजेटीए ने इस्कॉन पर भ्रम फैलाने का गंभीर आरोप लगाया कि पुरी के मानद राजा गजपति महाराजा दिब्यसिंह देब ने इन बेवक्त रथ यात्राओं को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मंजूरी दी है। दरअसल, महाराजा ने केवल बर्लिन, जर्मनी में इस्कॉन के एक रथ यात्रा कार्यक्रम का दौरा किया था। वहीं, जब इस पूरे विवाद पर इस्कॉन के संचार निदेशक और राष्ट्रीय प्रवक्ता युधिष्ठिर गोविंद दास से संपर्क किया, तब उन्होंने एसजेटीए के बयान को पढ़े बिना कोई भी टिप्पणी करने से साफ इंकार किया।


