मुम्बई । भारतीय टीम के साथ इंग्लैंड दौरे पर गये 15 साल के वैभव सूर्यवंशी को बेहतर प्रदर्शन के बाद भी खेलने का अवसर नहीं मिल रहा और वह बेंच पर ही बैठे हुए हैं। वैभव को इससे पहले आयरलैंड के खिलाफ सीरीज में भी अवसर नहीं दिय गया था और अब तक वह बैंच पर बैठकर और ड्रिंग्स लेकर ही मैदान पर जाते दिख रहे हैं। इस प्रकार का इंतजार नया नहीं है। इससे पहले महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर को भी डेब्यू से पहले अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा था।
आज प्रशंसक वैभव के शानदार फॉर्म के बावजूद उन्हें डेब्यू न कराए जाने पर सवाल उठा रहे हैं, मगर ये पहली बार नहीं हो रहा। सचिन को भी ऐसे ही दिनों का सामना करना पड़ा था, जब चयन के बावजूद उन्हें साल भर तक अवसर नहीं मिला था। 80 का दशक समाप्त होते-होते सचिन का नाम उभरने लगा था। स्कूल क्रिकेट में धूम मचाने के बाद चारों ओर उनकी ही चर्चा थी कि मुंबई के शिवाजी पार्क से निकला एक छोटा सा बच्चा मैदान पर छाया हुआ है। अखबार सचिन की तस्वीरों से भरे पड़े थे।
केवल 14 साल की उम्र में सचिन को 1987/88 के घरेलू सीजन के लिए मुंबई की टीम में शामिल किया गया। उस दौर में मुंबई क्रिकेट में आना भारतीय टीम में आने से भी ज्यादा कठिन माना जाता था। मुंबई की टीम में चयन के बाद पूरे एक साल तक सचिन बेंच पर बैठकर अपनी बारी का इंतजार करते रहे, उन्हें एक भी मैच खेलने का मौका नहीं मिला. इतनी कम उम्र में यह इंतजार किसी भी खिलाड़ी के लिए आसान नहीं होता, कई युवा हताश हो जाते हैं पर सचिन ने अपने को टूटने नहीं दिया. उन्होंने नेट्स में लगातार अभ्यास करके अपने खेल को और निखारा।
आखिरकार, 15 साल और 232 दिन की उम्र में उन्हें मुंबई के लिए रणजी ट्रॉफी में पहला मैच खेलने का मौका मिला. उनके डेब्यू की कहानी भी काफी दिलचस्प है; न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट मैच की तैयारी कर रही भारतीय टीम के नेट सेशन में उन्होंने कप्तान दिलीप वेंगसरकर को प्रभावित किया था, जिसके बाद उन्हें यह मौका मिला। वानखेड़े स्टेडियम में नंबर 4 पर बल्लेबाजी करने उतरे सचिन ने अपने डेब्यू मैच में ही 129 गेंदों में नाबाद 100 रन जड़कर इतिहास रच दिया था. नंबर 4 की यही पोजिशन बाद में टेस्ट क्रिकेट में उनकी पहचान बन गई.
इसी प्रकार आज वैभव के मामले में भी कुछ वैसी ही तस्वीर दिखाई दे रही है। चयन होने के बावजूद उन्हें लगातार अंतिम ग्यारह में जगह नहीं मिल रही है। सचिन की ही तरह वैभव सूर्यवंशी को भी अपने इस इंतजार को तैयारियों में बदलना होगा। उन्हें भी समय आने पर अवसर मिलेगा। अब देखना है कि वह सचिन का सबसे कम उम्र में डेब्यू का रिकार्ड तोड़ पाते हैं या नहीं।


