नई दिल्ली । राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और सहकारिता एवं गृह मंत्री अमित शाह सहित कई नेताओं ने मंगलवार को ‘हूल दिवस’ के अवसर पर भारत की स्वतंत्रता, आदिवासी अस्मिता और सामाजिक न्याय के लिए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देने वाले अमर वीरों को विनम्र श्रद्धांजलि दी।
राष्ट्रपति मुर्मु ने एक्स पर कहा, “‘हूल दिवस’ के अवसर पर सिदो-कान्हू, चांद-भैरव, फूलो-झानो तथा संथाल विद्रोह के सभी अमर वीर-वीरांगनाओं के त्याग और बलिदान को सादर नमन करती हूं। जनजातीय समाज के शोषण के विरुद्ध तथा उनकी अस्मिता की रक्षा के लिए उन्होंने ऐतिहासिक संघर्ष किया। उनका शौर्य, त्याग और बलिदान सभी देशवासियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा।”
बिरला ने कहा कि आज के दिन महान क्रांतिकारी सिदो और कान्हू के नेतृत्व में ऐतिहासिक संथाल हूल के उन हजारों वीर आदिवासी स्त्री-पुरुषों को नमन, जिन्होंने औपनिवेशिक शासन, शोषण और अन्याय के विरुद्ध अदम्य साहस के साथ संघर्ष का बिगुल फूंका। जल, जंगल, जमीन, स्वाभिमान और अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए लड़ा गया यह एक महान जनआंदोलन था। इस जनक्रांति ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को नई ऊर्जा प्रदान की और कागे चलकर अनेक आंदोलनों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी। उन अमर हुतात्माओं का शौर्य, त्याग और राष्ट्रप्रेम आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा।
अमित शाह ने कहा कि जनजातीय स्वाभिमान और स्वतंत्रता संग्राम के महानायक सिदो-कान्हू मुर्मु, चांद-भैरव तथा वीरांगनाओं फूलो-झानो ने अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध संघर्ष का ऐसा शंखनाद किया, जिसने पराधीनता के विरुद्ध जन-जन में प्रतिरोध की चेतना का संचार किया।
केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि संथाल हूल दिवस जनजातीय समुदाय द्वारा आजादी के लिये किये गये संघर्ष का प्रतीक है। आज का दिन उन महान देशभक्तों को स्मरण करने का दिन है जिन्होंने अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध लड़ते हुए अपना संपूर्ण जीवन बलिदान कर दिया।


