संताल एक्सप्रेस संवाददाता
लिट्टीपाड़ा (पाकुड़)। प्रखंड के बरमसिया स्थित निर्माणाधीन तिलका मांझी नेचर पार्क को लेकर वन विभाग पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर पार्क निर्माण में करोड़ों रुपये की वित्तीय गड़बड़ी और सरकारी राशि के दुरुपयोग की आशंका जताई गई है।प्राप्त जानकारी के अनुसार सरकार द्वारा नेचर पार्क निर्माण के लिए 665.04 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी। गोड्डा निवासी चंदन कुमार को आरटीआई के माध्यम से मिले दस्तावेजों में बताया गया है कि वन विभाग ने 31 मार्च 2026 तक निर्माण कार्य पूर्ण होने की रिपोर्ट प्रस्तुत कर पूरी राशि की निकासी कर ली है। हालांकि स्थानीय लोगों का दावा है कि स्थल पर अब तक 50 प्रतिशत कार्य भी पूरा नहीं हुआ है।
ऐसे में फर्जी बिल और फर्जी मजदूरों के नाम पर भुगतान कर सरकारी राशि की बंदरबांट किए जाने की आशंका व्यक्त की जा रही है।स्थानीय मजदूरों ने आरोप लगाया कि उन्हें मजदूरी का भुगतान बैंक खाते के माध्यम से नहीं बल्कि नकद किया जा रहा है। मजदूरों के अनुसार उन्हें निर्धारित दर के बजाय केवल 350 रुपये प्रतिदिन नकद दिए जाते हैं। जबकि विभागीय नियमों के तहत मजदूरी का भुगतान बैंक खाते के माध्यम से किया जाना अनिवार्य है। इसे लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।मामले में पक्ष जानने के लिए पाकुड़ वन प्रमंडल पदाधिकारी सौरव चंद्रा से दूरभाष पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। वहीं रेंजर विनोद कुमार ने फोन रिसीव नहीं किया। फॉरेस्ट गार्ड अनुपम यादव ने कहा कि उन्हें इस संबंध में जानकारी देने का अधिकार नहीं है और विस्तृत जानकारी रेंजर स्तर से ही प्राप्त की जा सकती है।
उल्लेखनीय है कि लिट्टीपाड़ा क्षेत्र हिरणपुर वन प्रक्षेत्र कार्यालय के अधीन आता है। जानकारी के अनुसार 1 अप्रैल 2026 से यहां किसी वन क्षेत्र पदाधिकारी की पदस्थापना नहीं है। ऐसे में निर्माण कार्य किस अधिकारी की निगरानी में कराया जा रहा है, यह भी जांच का विषय बन गया है।इधर स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषी अधिकारियों और संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा का माहौल गर्म है और सरकारी राशि के उपयोग को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।
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