दुमका के जोगियाटीकर टोला में बदहाली के आंसू रो रहे 17 परिवार
ब्यूरो
दुमका । जामा प्रखंड के गायबथान गांव का जोगियाटीकर टोला आज के डिजिटल युग में भी विकास की मुख्यधारा से कोसों दूर है। यहां रहने वाले आदिम जनजाति के करीब 17 परिवार पिछले दो सालों से एक अदद बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। टोला में लगा एकमात्र सोलर जलमीनार बीते दो वर्षों से सफेद हाथी बनकर खड़ा है। ग्रामीण इसकी शिकायत स्थानीय मुखिया से भी कर चुके हैं, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात ही रहा। आज तक इस जलमीनार को ठीक करने की जहमत किसी ने नहीं उठाई।
जलमीनार खराब होने के कारण पूरा टोला सिर्फ एक चापाकल के भरोसे जीने को मजबूर है। स्थिति इतनी विकट है कि इसी एक चापाकल से इंसानों के साथ-साथ मवेशी भी अपनी प्यास बुझाते हैं। सुबह होते ही पानी भरने के लिए लंबी कतारें लग जाती हैं, जिससे ग्रामीणों का रोजमर्रा का काफी समय सिर्फ पानी के इंतजाम में ही बर्बाद हो जाता है।पानी की किल्लत के साथ-साथ इस टोले की राहें भी बेहद पथरीली और कटीली हैं। देश की आजादी के 79 वर्ष और अलग झारखंड राज्य बनने के 26 वर्ष बीत जाने के बाद भी यह टोला मुख्य पक्की सड़क से नहीं जुड़ पाया है। दलदली मुख्य मार्ग से इस टोले की दूरी महज एक किलोमीटर है, लेकिन प्रशासन के लिए यह एक किलोमीटर का फासला तय करना भी मुमकिन नहीं हो पाया है। टोले के भीतर पीसीसी ढलाई तक नहीं हुई है।
सड़क न होने का सबसे खौफनाक मंजर बरसात के दिनों में देखने को मिलता है। बारिश होते ही पूरा टोला कीचड़ के दलदल में तब्दील हो जाता है, जहां पैदल चलना भी दूभर है। ऐसे में अगर कोई बुजुर्ग, गंभीर मरीज या गर्भवती महिला बीमार हो जाए, तो गांव तक एम्बुलेंस का पहुंचना नामुमकिन हो जाता है। ग्रामीणों को मरीजों को खाट पर लादकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है, जिससे कई बार जान पर बन आती है।प्रशासनिक उपेक्षा से तंग आकर अब ग्रामीणों का सब्र का बांध टूट चुका है। पुरण पुजहर, विशु पुजहर, राजू पुजहर, प्रमिला देवी, आभा देवी और नोमिता देवी सहित बड़ी संख्या में एकजुट हुए ग्रामीणों ने सरकार और जिला प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है। ग्रामीणों ने दो टूक मांग की है कि बंद पड़े जलमीनार को तुरंत चालू किया जाए, गांव में पीसीसी सड़क का निर्माण हो और टोले को मुख्य पक्की सड़क से जोड़ा जाए ताकि वे भी एक गरिमापूर्ण जीवन जी सकें।


