72 फीसदी कुर्क संपत्ति लौटानी पड़ी..
नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई और उसकी सफलता दर को लेकर सामने आए आंकड़ों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पिछले 20 वर्षों में ईडी द्वारा दर्ज हजारों मामलों में से केवल 1 फीसदी मामलों में ही अंतिम सजा हो सकी है। आंकड़ों के अनुसार 20 साल में केवल 60 मामलों की सुनवाई पूरी हुई, जबकि दोषसिद्धि दर 93 फीसदी बताई जा रही है। ईडी ने इस दौरान बड़ी मात्रा में संपत्तियां कुर्क कीं, लेकिन इनमें से करीब 72 फीसदी संपत्ति बाद में लौटानी पड़ी।
इससे जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक 2005 से 2014 तक मामलों की संख्या सीमित थी, लेकिन 2019 के बाद केस दर्ज करने और मामलों को बंद करने की रफ्तार तेजी से बढ़ी। आंकड़ों में यह भी सामने आया कि गिरफ्तारी और कुर्की की कार्रवाई में लगातार वृद्धि हुई, लेकिन उसके अनुपात में सजा के मामले बेहद कम रहे। विशेषज्ञों का कहना है कि लंबी कानूनी प्रक्रिया और पर्याप्त साक्ष्यों की कमी इसकी बड़ी वजह हो सकती है। वहीं विपक्ष लगातार एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाता रहा है, जबकि सरकार इसे भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ सख्त कार्रवाई बता रही है।


