दुमका । आदिवासी अधिकार राष्ट्रीय मंच से संबद्ध आदिवासी अधिकार मंच, झारखंड के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली में केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री जुएल ओराम से मुलाकात की। उनके आवासीय कार्यालय में देर शाम हुई इस बैठक के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने झारखंड के आदिवासियों की गंभीर समस्याओं और मांगों से संबंधित एक विस्तृत मांगपत्र सौंपा।
इस मांगपत्र में दुमका जिले के गोपीकांदर प्रखंड के मोहलडाबर, कुंडा पहाड़ी और चिरुडीह गांवों का मामला प्रमुखता से उठाया गया। मंच ने मांग की है कि वनभूमि पर पीढ़ियों से रह रहे और खेती कर रहे अति पिछड़ी आदिम जनजाति पहाड़िया समुदाय के लोगों को उनके दावों के आधार पर तुरंत वन पट्टा दिया जाए और इस जमीन का रैयतीकरण किया जाए। इसके साथ ही उचित मुआवजा, ग्राम सभा की अनुमति और प्रभावितों के पुनर्वास व रोजगार के बिना नवेली उत्तर प्रदेश पावर लिमिटेड द्वारा किए जा रहे भूमि अधिग्रहण और अवैध खनन पर तुरंत रोक लगाने की मांग की गई है।
प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रीय स्तर की मांगों को दोहराते हुए जनगणना प्रपत्र के साथ-साथ बैंकों और सभी सरकारी कार्यालयों के फॉर्मों में आदिवासी या सरना धर्म का अलग कॉलम शामिल करने का आग्रह किया। इसके अलावा पेसा मोबलाइजरों की छंटनी का फैसला वापस लेने, रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट के विस्थापितों को हटाने से पहले उचित पुनर्वास व बकाया मुआवजा देने और पहाड़िया जैसी अति पिछड़ी जनजातियों के कल्याण के लिए एक अलग ‘अति पिछड़ी जनजाति आयोग’ का गठन करने की पुरजोर मांग की गई।
केंद्रीय मंत्री को मांगपत्र सौंपने वाले इस प्रतिनिधिमंडल में आदिवासी अधिकार राष्ट्रीय मंच के अध्यक्ष व पूर्व सांसद जितेंद्र चौधरी, उपाध्यक्ष व पूर्व सांसद वृंदा करात, झारखंड राज्य संयोजक सुखनाथ लोहरा, छोटा नागपुर के संयोजक प्रकाश टोप्पो और आदिम जनजाति राज्य संयोजक देवी सिंह पहाड़िया शामिल थे।
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