अशोक कुमार
हरिवंश केवल एक नाम नहीं बल्कि एक शख्सियत हैं, जिन्हें पत्रकारिता,राजनीति और सामाजिक क्षेत्र में बड़े आदर के साथ जाना जाता है। मृदुभाषी, सरल स्वभाव और वीआईपी होते हुए भी वीआईपी कल्चर से दूर सामान्य रहन-सहन इनके व्यक्तित्व की खासियत है। दो टर्म राज्यसभा के उपसभापति रहने के बावजूूद ये बॉडीगार्ड लेकर आमतौर पर नहीं चलते हैं। तड़क-भड़क और दिखावटी पन से यह कोसों दूर हैं। रांची हो या दिल्ली आवास पर कोई भी व्यक्ति इन से आसानी से मिल सकता है। संवैधानिक पद पर रहते हुए भी इनमें शान -शौकत और दिखावे की कोई पहचान नहीं है। पत्रकारिता के क्षेत्र में इन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनायी है। धर्मयुग, रविवार और प्रभात खबर आदि पत्र-पत्रिकाओं में काम करते हुए अपनी उल्लेखनीय पत्रकारिता की छवि विकसित की और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनायी। प्रभात खबर को पुनरस्थापित करने और इस अखबार के कई संस्करण निकलने में इनकी अहम भूमिका रही है। सक्रिय राजनीति में नहीं रहकर भी इनका संबंध बड़े-बड़े राजनेताओं से रहा है।
पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चंद्रशेखर के सहायक प्रेस सलाहकार भी रहे हैं और नीतीश कुमार से इनकी मित्रता जग जाहिर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार के बीच बेहतर संबंध स्थापित करने में भी इनकी अहम भूमिका थी। नौकर शाहों से भी इनके अच्छे संबंध रहे हैं। प्रभात खबर के प्रधान संपादक रहते हुए भी झारखंड में व्याप्त भ्रष्टाचार और राजनीतिक अस्थिरता पर कई महत्वपूर्ण आलेख लिखकर झारखंड में लोगों के बीच जागरुकता फैलाने का काम किया है। प्रभात खबर की पत्रकारिता को जनसरोकार और धारदार पत्रकारिता बनाने का श्रेय इन्हें ही जाता है। आध्यात्मिक क्षेत्र के कई बड़े गुरुओं के बारे में और उनका साक्षात्कार लेकर अध्यात्म के प्रति लोगों में रुचि पैदा करने की कोशिश की है। हरिवंश जी सामाजिकता निभाना भी बखूबी जानते है। यदि उन्हें समय पर निमंत्रण मिल जाए और वे रांची में उपलब्ध हो तो बिना भूले शादी समारोह और मांगलिक कार्यों में जरुर पहुंच जाते हैं।
एक बार मैंने अपने गृह प्रवेश के लिए उन्हें निमंत्रण कार्ड न दे पाकर सिर्फ फोन से गृह प्रवेश में आने का निमंत्रण दिया तो वे समय पर गृह प्रवेश में पहुंच चुके थे। आज वे सक्रिय पत्रकारिता में नहीं हंै लेकिन अपने आलेखों के माध्यम से देश,समाज और पत्रकारिता जगत को एक नई दिशा देने का प्रयास लगातार करते आ रहे हैं। जेपी,चंद्र शेखर, डॉ राम मनोहर लोहिया जैसे समाजवादी नेताओं से प्रभावित होने के कारण इनकी लेखनी और विचार पर समाजवादी छाप देखने को मिलती है, लेकिन अब बदलती राजनीति परस्थितियों में इनका झुकाव दक्षिण पंत की ओर जा रहा प्रतीत होता है। और इसका सबसे बड़ा उदाहरण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इनके अच्छे रिश्ते होना है। यही वजह है कि जब राज्यसभा में इनका दूसरा टर्म पूरा हो चुका था और बिहार से इन्हें जदयू ने तीसरी बार राज्यसभा के लिए उम्मीदवार नहीं बनाया तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति से इन्हें मनोनीत करवा कर राज्यसभा में तीसरा टर्म दिया। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे अपना आदर्श धर्मयुग के संपादक धर्मवीर भारती को मानते हैं। सौभाग्य से मेरे पत्रकारिता गुरु भी धर्मवीर भारती हैं। इसलिए मैं हरिवंश जी को अपना गुरु भाई मानता हूं।


