मुंबई । साइलेंट कॉल स्कैम आज के डिजिटल दौर का एक नया और खतरनाक साइबर फ्रॉड तरीका है, जिसमें ठग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का इस्तेमाल करके लोगों को निशाना बनाते हैं। इस स्कैम में यूजर्स के फोन पर इसतरह के कॉल आते हैं, जिन्हें उठाने पर सामने से कोई आवाज नहीं आती। कई लोग इस स्कैम को सामान्य तकनीकी समस्या या मजाक समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन वास्तव में यह एक सोची-समझी चाल होती है। इस तरह के कॉल्स का मुख्य उद्देश्य सीधे पैसे ठगना नहीं होता, बल्कि यूजर्स के फोन नंबर की सक्रियता को जांचना होता है। साइबर अपराधी ऑटोमैटिक कॉलिंग सिस्टम के जरिए हजारों नंबरों पर कॉल करते हैं और यह पता लगाते हैं कि कौन-सा नंबर सक्रिय है और कौन कॉल रिसीव करता है। जैसे ही कोई व्यक्ति कॉल उठाता है, उसका नंबर “सक्रिय लिस्ट” में शामिल कर लिया जाता है। इसके बाद उस नंबर को भविष्य में बड़े स्कैम के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
यह स्कैम इसलिए अधिक खतरनाक है क्योंकि यह एक शुरुआती चरण होता है। एक बार आपका नंबर ठगों की लिस्ट में शामिल हो गया, तो आपको फिशिंग कॉल, फर्जी बैंक कॉल, ओटीपी स्कैम या मैसेज फ्रॉड का निशाना बनाया जा सकता है। कई मामलों में ठग खुद को बैंक अधिकारी या किसी सरकारी संस्था का प्रतिनिधि बताकर संवेदनशील जानकारी हासिल करने की कोशिश करते हैं। साइलेंट कॉल स्कैम को पहचानना मुश्किल नहीं है। अगर आपको बार-बार ऐसे कॉल आ रहे हैं, जिनमें कोई बात नहीं करता या कॉल कुछ सेकंड में अपने आप कट जाता है, तो सतर्क हो जाना चाहिए। यह संकेत हो सकता है कि आपका नंबर स्कैमर्स के निशाने पर है। इससे बचने के लिए कुछ सावधानियां बेहद जरूरी हैं। सबसे पहले, किसी भी अज्ञात नंबर से आए कॉल को ज्यादा देर तक कनेक्ट न रखें और तुरंत काट दें। अनजान कॉलर्स को कभी भी अपनी निजी जानकारी, बैंक डिटेल या ओटीपी साझा न करें। अपने फोन में स्पैम फिल्टर और कॉल ब्लॉकिंग फीचर का उपयोग करें, ताकि संदिग्ध कॉल्स को रोका जा सके। अंत में, सतर्कता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है। यदि आप थोड़ी सावधानी बरतें, तब इस तरह के एआई आधारित स्कैम से खुद को और अपने बैंक अकाउंट को सुरक्षित रख सकते हैं।
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