संताल एक्सप्रेस
पाकुड़।अपनी पेट की आग बुझाने को लेकर देश के हजारों परिवार अपनी राज्य छोड़ अन्यत्र राज्य आकर अपनी दो वक्त की रोटी के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। ऐसा ही मार्मिक दृश्य जिले के हिरणपुर बाजार के दामिन डाकबंगला परिसर में देखने को मिला, जहां मध्य प्रदेश से आए दो से तीन परिवार और बल बच्चों के साथ फुटपाथ पर अस्थायी दुकान लगाकर लोहे के घरेलू औजार बनाने व बिचने को मजबूर हैं।जानकारी के अनुसार मध्य प्रदेश के बीरसिंह लोहार और सोनू लोहार अपने परिवार के साथ हिरणपुर पहुंचे हैं। इन सभी के परिवारों में महिला, पुरुष और बच्चों को मिलाकर कुल 20 सदस्य शामिल हैं। परिवार के पुरुषों के साथ महिलाएं भी कंधे से कंधा मिलाकर दिनभर मेहनत करती नजर आती हैं। पुरुष और महिलाएं मिलकर लोहे का हंसुआ, खुरपी, छेनी, हथौड़ी, टांगी सहित अन्य घरेलू उपयोग के औजार मौके पर ही बनाकर ग्राहकों को बेचते हैं। कड़ाके की ठंड के बावजूद ये परिवार दामिन डाकबंगला परिसर में खुले आसमान पर तंबू लगाकर रात गुजारने को मजबूर हैं। खुले आसमान के नीचे ठंड से ठिठुरते हुए सोना और भूख से जूझना इनकी रोजमर्रा की जिंदगी बन चुकी है।
इस संबंध में बीरसिंह लोहार ने बताया कि लोहे के औजार बनाना उनका पुश्तैनी पेशा है। उनके पिता और दादा भी यही कार्य करते थे। ये मेरा खदानी कार्य है, उन्होंने बताया कि हमारे गांव के अधिकांश लोहार परिवार हर साल जून से नवंबर तक अपने गांव में रहते हैं, जबकि दिसंबर से मई तक देश के विभिन्न हिस्सों में जाकर औजार बनाकर विक्री कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। गरीबी, ठंड और असुरक्षा के बीच संघर्ष कर रहे इन परिवारों की जिंदगी इस बात की गवाही देती है कि आज भी समाज का एक बड़ा तबका बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। पेट की आग बुझाना और बच्चों का भविष्य संवारना इन गरीब परिवारों के लिए रोज की सबसे बड़ी जंग बन चुका है।


