नाला (जामताड़ा): आदिवासियों का पारंपरिक एवं सांस्कृतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व सोहराय इन दिनों पूरे क्षेत्र में पूरे उल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। पर्व के चौथे दिन बुधवार को विधि-विधानपूर्वक जाले माहा अनुष्ठान संपन्न हुआ। सोहराय के चौथे दिन आदिवासी समुदाय के युवक-युवतियों ने मांदर और नगाड़े की थाप पर पारंपरिक नृत्य एवं लोकगीतों की मनोहारी प्रस्तुतियां दीं। रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में सजे प्रतिभागियों ने घर-घर जाकर नृत्य-गीत प्रस्तुत करते हुए प्रसाद एवं पारंपरिक भोजन ग्रहण किया। साथ ही सामुदायिक भोज का भी आयोजन किया गया, जिसमें ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
इस अवसर पर धोबना पंचायत की मुखिया सावित्री किस्कु एवं मुखिया प्रतिनिधि नुनूधन किस्कु ने बताया कि सोहराय पर्व के चौथे दिन जाले माहा का विशेष महत्व होता है। इस दिन किए जाने वाले धार्मिक अनुष्ठान और परंपरागत गतिविधियां समाज को एक सूत्र में बांधने का कार्य करती हैं।उन्होंने कहा कि सोहराय पर्व आदिवासी समाज में सौहार्द, एकता और भाईचारे का प्रतीक है। यह पर्व हमारी प्राचीन संस्कृति, सभ्यता और अस्तित्व को जीवंत बनाए रखने का माध्यम है। आदिवासी समाज आदिकाल से ही प्रकृति से गहराई से जुड़ा रहा है और यह पर्व हमारे पूर्वजों की अमूल्य धरोहर है, जिसे हमें आने वाली पीढ़ियों तक संरक्षित रखना चाहिए।


