जनता के गुस्से ने सत्ताधारियों को कुर्सी छोड़ने पर किया मजबूर
नई दिल्ली । 2025 यह साल भारत के साथ-साथ दुनिया के कई देशों के लिए भी बेहद उथल-पुथल भरा रहा। राजनीति में उठे तूफानों ने कई सरकारों को हिला दिया, कहीं चुनाव ने इतिहास बदल दिया तो कहीं जनता के गुस्से ने सत्ताधारियों को कुर्सी छोड़ने पर मजबूर कर दिया। भारत में 2025 वह साल है जिसने देश की राजनीति को कई बार झकझोरा, कभी चुनावों ने, कभी नए कानून ने, तो कभी आतंकी हमले और सैन्य जवाबी कार्रवाई ने। दूसरी ओर हमारे पड़ोसी मुल्क भी अशांति, प्रदर्शन और सत्ता संघर्ष से जूझते नजर आए। नेपाल, बांग्लादेश, पाकिस्तान और श्रीलंका जैसे देशों ने सरकार गिरने और सत्ता परिवर्तन का सामना किया। अफ्रीकी देश बेनिन में भी सेना ने सत्ता पर कब्जा कर लिया। साल 2025 में कई देशों में सरकार गिरी कहीं तख्तापलट भी हुए।
* नेपाल में सोशल मीडिया बैन ने युवाओं को भड़का दिया। जेन-जेड ने इसे अपनी अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला माना। प्रदर्शन इतना बढ़ा कि पीएम केपी शर्मा ओली और राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल दोनों को इस्तीफा देना पड़ा। राष्ट्रपति भवन में आग लगा दी गई और कई नेताओं को भीड़ ने घेर लिया। यह सीधा सत्ता परिवर्तन था।
* बांग्लादेश में 2024 में हुए विशाल छात्र आंदोलनों ने शेख हसीना की सरकार गिरा दी थी। 2025 में भी वहां अस्थिरता जारी रही। अंतरिम सरकार के दो बड़े सलाहकारों ने चुनाव से पहले इस्तीफा दे दिया, जिससे राजनीतिक संकट और गहरा गया। यह आंदोलन छात्र, सरकार के रूप में सामने आया।
* 8 दिसंबर 2024 को सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल-असद देश छोड़कर भाग गए थे। यह घटना सीरिया के आधुनिक इतिहास का सबसे बड़ा राजनीतिक मोड़ बन गई। देश में लम्बे समय से चल रहे विरोध और विद्रोह ने असद सरकार को कमजोर कर दिया। उत्तरी सीरिया के इदलिब क्षेत्र से उभरे मजबूत विद्रोही गुट तेजी से राजधानी दमिश्क की ओर बढ़ रहे थे। हालात पूरी तरह असद सरकार के कंट्रोल से बाहर हो गए। आखिरकार 8 दिसंबर 2024 को बशर अल-असद चुपचाप देश छोड़कर विदेश भाग गए। इसके बाद 2025 में अंतरिम सरकार बनी, मानवाधिकार सुधारों की कोशिशें हुई, लेकिन हिंसा, अपहरण और हमले 2025 में भी जारी रहे।
* मई 2023 में पाकिस्तान के पीएम इमरान खान की गिरफ्तारी से जो आग भड़की थी, उसकी लपटें 2025 तक दिखती रहीं। सरकारी इमारतें जलाई गईं, सेना के ठिकाने घिरे, इंटरनेट बंद और कर्फ्यू जैसे हालात। यह अशांति राजनीतिक अस्थिरता का कारण बनी और सरकार की पकड़ कमजोर हुई।
* साल 2022 से ही श्रीलंका आर्थिक संकट में था। जनता के गुस्से ने सत्ता को हिला दिया था। राष्ट्रपति और पीएम को देश छोड़ना पड़ा। 2025 में भी वहां की राजनीति अशांत रही और पूर्व नेता भ्रष्टाचार के मामलों में जेल में हैं।
* 2021 में हुए सैन्य तख्तापलट के बाद म्यांमार अब भी राजनीतिक हिंसा और अस्थिरता में डूबा हुआ है। लोकतांत्रिक ताकतें आज भी लड़ाई लड़ रही हैं, लेकिन सेना सत्ता पर काबिज है।
* 2021 में अमेरिका सेना के जाने के बाद तालिबान का अफगानिस्तान पर कब्जा हो गया। 2025 तक वहां लोकतंत्र की कोई उम्मीद नहीं दिखी और जनता दमन का सामना कर रही है।
* अफ्रीकी देश बेनिन में 2025 में सेना ने मिलिट्री कमिटी फॉर रीफाउंडेशन नाम से सत्ता पर कब्जा कर लिया। राष्ट्रपति को हटाया और चुनाव भी खटाई में पड़ गए।
इसलिए हुए तख्तापलट व गिरी सरकारें
साल 2025 में तख्तापलट और सरकारों के गिरने की घटनाएं इसलिए बढ़ीं क्योंकि कई देशों में आर्थिक संकट गहराता गया, बेरोजगारी और महंगाई ने लोगों का जीवन मुश्किल बना दिया, और भ्रष्टाचार व सत्ता के दुरुपयोग ने जनता का भरोसा तोड़ दिया। सोशल मीडिया ने भी बड़ी भूमिका निभाई, युवाओं की आवाज तेजी से फैलती गई, विरोध आंदोलनों को संगठित होने की ताकत मिली और सरकारों पर दबाव बढ़ा। कई जगह लोकतांत्रिक संस्थाएं कमजोर हुईं, विपक्ष को दबाया गया और अभिव्यक्ति की आजादी पर हमले हुए, जिसके चलते जनता सड़कों पर उतर आई। इन सभी कारणों से दुनिया के कई देशों में राजनीतिक अस्थिरता पैदा हुई और 2025 का साल उथल-पुथल भरा रहा।
अलविदा 2025!


