रांची । बोकारो जिले के चर्चित तेतुलिया वनभूमि घोटाला मामले में आरोपित शैलेश सिंह ने झारखंड उच्च न्यायालय में जमानत याचिका दाखिल की है। याचिका में कुछ त्रुटियां (डिफेक्ट) थीं, जिन्हें नजरअंदाज करने की अनुमति के लिए शैलेश सिंह की ओर से अंतरिम आवेदन (आईए) दाखिल किया गया था। इस आवेदन पर मंगलवार को न्यायाधीश अनिल कुमार की पीठ में सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद अदालत ने जमानत याचिका में मौजूद डिफेक्ट को नजरअंदाज करने की अनुमति दे दी। साथ ही स्टांप रजिस्ट्री को जमानत याचिका नए सिरे से अदालत के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया। इसके बाद अब शैलेश सिंह की जमानत याचिका पर नियमित रूप से सुनवाई का रास्ता साफ हो गया है। सीआईडी ने शैलेश सिंह को जुलाई 2026 में पटना से गिरफ्तार किया था।
जांच के अनुसार, शैलेश सिंह ने अंसारी बंधुओं की ओर से तैयार किए गए कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 103 एकड़ वनभूमि की बिक्री के लिए पावर ऑफ अटॉर्नी लिया था। इसके बाद इसमें से 74 एकड़ जमीन अपने बेटे के नाम पर बनी आयुष मल्टीकॉम नामक कंपनी को बेच दी थी। जांच में सामने आया कि तेतुलिया की उक्त जमीन को अंसारी बंधुओं ने कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अपनी पैतृक संपत्ति बताते हुए दावा किया था। इसी आधार पर अंचल कार्यालय से जमीन का दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) अंसारी बंधुओं के नाम कर दिया गया था। बाद में मामले की जांच के दौरान अनियमितताएं सामने आने पर सरकार ने तत्कालीन अंचल अधिकारी को बर्खास्त कर दिया था। मामले में वन विभाग ने उक्त जमीन को वनभूमि बताते हुए अपना दावा पेश किया था। इसके बाद राज्य सरकार ने पूरे प्रकरण की जांच अपराध जांच विभाग (सीआईडी) को सौंप दी। तेतुलिया वनभूमि घोटाले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी कर रहा है।


