सांस की नली में जलन और सूजन, जहरीली हवा का मापन ठीक तरीके से नहीं
नईदिल्ली । भारत में एयर क्वालिटी इंडेक्स को लेकर कहा जा रहा है। भारत में सही तरीके से एक्यूआई का माप नहीं हो रहा है। देश के 50 फ़ीसदी शहरों की एक्यूआई में पीएम 2।5 का मापन ही नहीं किया जाता है।
भारत के 583 शहरों में 1592 एयर क्वालिटी स्टेशन बने हुए हैं। इनमें से 294 शहरों में 562 रियल टाइम मॉनिटरिंग स्टेशन हैं।बाकी के 289 शहरों में 1035 मैन्युअल स्टेशन स्थापित किए गए हैं। मैन्युअल स्टेशन में पीएम 2।5 का नाप नहीं लिया जाता है। यहां हफ्ते में सिर्फ दो बार सैंपल के आधार पर हवा की गुणवत्ता बता दी जाती है।
एक्यूआई 0 से 500 के बीच की एक संख्या है।जो हवा में सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, पीएम 2।5, पीएम 10, ओजोन कार्बन, मोनो ऑक्साइड, अमोनिया हवा में कितना है।इसकी गणना के आधार पर रिपोर्ट तैयार की जाती है। जितना कम नंबर होता है। हवा उतनी अच्छी मानी जाती है।जो मॉनिटरिंग हवा की की जा रही है, वह 10 किलोमीटर के क्षेत्र के अंदर की जाती है। इससे शहरों की पचासी फ़ीसदी आबादी को हवा के गुणवत्ता की सही जानकारी नहीं मिलती है। इस हिसाब से 64 फ़ीसदी जिलों में सही मायने में हवा कितनी जहरीले है। इसका वास्तविक रूप से पता ही नहीं चल पाता है। महानगरों में भी 22 से 55 आबादी इस दायरे में आती है। 2 किलोमीटर के बफर जोन वाले मॉनिटरिंग स्टेशन मात्र 1।7 फ़ीसदी आबादी को कवर करते हैं।
सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट की कार्यकारी अध्यक्ष अनुमिता राय चौधरी का कहना है।मॉनिटरिंग स्टेशनों का ऑडिट अनिवार्य किया जाना चाहिए।जो मानक और प्रोटोकॉल हैं। उनका पालन हो रहा है, या नहीं, इसको जानना भी जरूरी है।
फेफड़ों में कोरोना जैसे पैच
दिल्ली एनसीआर की जहरीली हवा ने डॉक्टरों को चौंका दिया है। सरकारी अस्पतालों के डॉक्टरों का कहना है, सीटी स्कैन में कोरोना महामारी के दौरान जिस तरह के फेफड़ों में पेंच देखने को मिल रहे थे। वही पेंच अभी देखने को मिल रहे हैं।सीटी स्कैन और चेस्ट एक्स-रे में जिस तरह की रिपोर्ट आ रही है। उसको देखते हुए कैंसर और कोरोना जैसे लक्षण देखने को मिल रहे हैं।सांस की नली में जलन और सूजन देखने को मिल रही है।इस पर डॉक्टरों द्वारा चिंता जताई गई है। इस समय दिल्ली के हालात बद से बदतर हैं। बच्चों और बुजुर्गों के ऊपर इसका बड़ा असर देखने को मिल रहा है।


