नई दिल्ली । औषधीय पौधा शतावरी को आयुर्वेद में सेहत का खजाना कहा गया है। हमारे देश में इसके पौधे को सतावर, सतामूली, शतावरी या सरनोई नामों से भी जाना जाता है। आयुर्वेदिक ग्रंथों में इसे महिलाओं के लिए अमृत और पुरुषों के लिए भी समान रूप से लाभकारी औषधि कहा गया है। यह पौधा खासतौर पर अपनी जड़ों में संचित औषधीय गुणों के लिए प्रसिद्ध है। शतावरी शरीर को भीतर से मजबूत बनाती है, रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है और हार्मोनल संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसकी तासीर ठंडी और स्वाद मधुर माना जाता है, इसलिए यह शरीर की गर्मी और रूखापन कम करके शरीर में नमी बनाए रखती है। शतावरी स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। डिलीवरी के बाद यदि दूध बनने में कमी हो या शिशु को पर्याप्त दूध न मिल पा रहा हो, तो रात में दूध के साथ शतावरी पाउडर का सेवन करने से दूध की मात्रा बढ़ने लगती है।
यह प्राकृतिक रूप से महिलाओं के शरीर में दूध बनने की प्रक्रिया को सक्रिय करता है और प्रसव के बाद होने वाली कमजोरी को भी कम करता है। यही कारण है कि पारंपरिक भारतीय चिकित्सा में शतावरी को प्रसूता महिलाओं की प्रमुख औषधि माना गया है। इसके साथ ही, जिन लड़कियों या महिलाओं को पीरियड्स में अनियमितता, हार्मोनल असंतुलन या अत्यधिक दर्द की समस्या रहती है, उनके लिए भी शतावरी का सेवन लाभकारी है। यह महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन के स्तर को संतुलित रखती है, जिससे प्रजनन क्षमता बेहतर होती है और गर्भावस्था में आने वाली जटिलताओं की संभावना कम होती है।
सुबह खाली पेट दूध के साथ शतावरी का सेवन करने की सलाह दी जाती है। पुरुषों के लिए भी शतावरी एक प्रभावी टॉनिक मानी गई है। जिन पुरुषों को कमजोरी, शुक्राणु की कमी, शीघ्रपतन या यौन स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं हो, उनके लिए शतावरी को अश्वगंधा और कौंच बीज के साथ दूध में उबालकर लेने की सिफारिश की जाती है। इससे वीर्य की गुणवत्ता सुधरती है और शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है। इसके अतिरिक्त, बार-बार यूरिन इंफेक्शन, पेशाब में जलन या मूत्र असंयम जैसी समस्याओं में भी शतावरी एक उपयोगी औषधि है। रात को दूध के साथ शतावरी लेने से मूत्र मार्ग की जलन दूर होती है और पेशाब की समस्या में राहत मिलती है।


