खर्च के साथ पढ़ाई में भी कम लग रही फीस, रहने खाने की टेंशन भी नहीं
नई दिल्ली । पहले जहां हर कोई अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया या यूरोप के अन्य देशों में जाना पसंद करता था, अब ज्यादातर भारतीय पश्चिमी एशिया के देशों का रुख कर रहे हैं। छात्र बताते हैं करियर के सपनों की नई मंजिलें अपने देश के करीब ही नहीं, सुरक्षित और किफायती भी हैं। केरल के त्रिशूर जिले के संजय कृष्णा अन्य छात्रों की तरह इस साल की शुरुआत में ब्रिटेन, अमेरिका और कनाडा विश्वविद्यालयों में दाखिला लेने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन पढ़ाई की लागत, वीजा संबंधी दिक्कतें, नौकरी की संभावनाएं और कुछ हद तक सुरक्षा चिंताओं ने उन्हें नई दिशा-दुबई की ओर मोड़ दिया। कृष्णा अब दुबई में मिडलसेक्स यूनिवर्सिटी के ग्लोबल कैम्पस में एमबीए कर रहे हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक संजय ब्रिटेन में उसी कोर्स के लिए 18 लाख रुपए फीस देने के लिए कहा गया था, लेकिन यहां मेरा कोर्स 14 लाख में हो जाएगा। यही नहीं, ब्रिटेन में उसके दोस्त रिहायश और अन्य जरूरतों पर प्रति माह एक लाख रुपए से ज्यादा खर्च कर रहे हैं, जबकि बेहतर सुविधाओं के साथ संजय 70,000 रुपए में काम चला रहे हैं। उसके कैम्पस में भारत के बहुत छात्र हैं। कृष्ण अकेले नहीं हैं, जो पश्चिम एशिया देशों को पढ़ाई के लिए चुन रहे हैं।
उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि 2023 से दुबई में रुचि दिखाने वाले छात्रों की संख्या में 40 गुना बढ़ी है। वीजा में दिक्कतें और जांच और वर्क वीजा को लेकर घबराहट के कारण छात्र पश्चिम एशिया मुख्य रूप से दुबई की ओर रुख कर रहे हैं। इसमें प्लस प्वाइंट यह है कि यहां कई नामी संस्थानों के ग्लोबल कैम्पस हैं।


