-पूर्व पीएम वाजपेयी के बयान से मिलते हैं इस बात के संकेत
-अमेरिकी खुफिया एजेंसी ने भी दिया था इशारा
नई दिल्ली । 18 मई 1998 की वहां तारीख जब अमेरिका के जाने-माने अखबार में एक खबर छपी कि भारत ने हाइड्रोजन बम का परीक्षण किया है। भारतीय वैज्ञानिकों ने बताया है कि उन्होंने पिछले हफ्ते पांच भूमिगत टेस्ट किए हैं, जिसमें एक हाइड्रोजन बम का भी था। हालांकि, पूरी दुनिया में भारत के इस एच-बम टेस्ट किए जाने को लेकर सवाल भी उठे थे। मगर, खुद तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और वैज्ञानिकों ने दो टूक कहा था कि अब भारत ने बड़ा बम बनाने की क्षमता हासिल कर ली है। अब जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुलासा किया है कि पाकिस्तान फिर परमाणु बम बना रहा है। तब जानकारों का कहना है कि भारत को अब हाइड्रोजन बम बना लेना चाहिए।
अमेरिका की केंद्रीय जांच एजेंसी (सीआईए) ने 2014 में एक सीक्रेट फाइल उजागर की थी। उसमें 19 मई, 1989 के एक इंटरव्यू का ज्रिक है, जिसमें सीईए के डायरेक्टर विलियम एच वेबस्टर ने कहा था कि इसतरह के संकेत हैं कि भारत हाइड्रोजन बम बना रहा है और उन्होंने परमाणु बम विस्फोट किए जाने की चेतावनी भी दी थी। उनकी बात सही साबित हुई और भारत ने दस साल बाद ही परमाणु टेस्ट कर लिया।
हाइड्रोजन बम सीधे शब्दों में परमाणु हथियार तकनीक का चरम है। भारतीय वैज्ञानिकों ने मई, 1998 में पांच परमाणु परीक्षण किए थे। इसमें हाइड्रोजन बम के विस्फोट को भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (बीएआरसी) के वैज्ञानिकों ने अपनी सर्वोच्च उपलब्धि माना था। इन टेस्ट के बाद गर्व से भरे तत्कालीन प्रधानमंत्री वाजपेयी ने कहा था कि अब हमारे पास एक बड़ा बम बनाने की क्षमता है।
भारतीय वैज्ञानिकों ने तब दावा किया था कि उनके पांच परमाणु परीक्षणों की कुल क्षमता 58 किलोटन थी। एक किलोटन विस्फोटक ऊर्जा 1,000 टन टीएनटी के बराबर होती है। वहीं, सिर्फ हाइड्रोजन बम की क्षमता 45 टन थी। 1 नवंबर, 1952 को अमेरिका ने दुनिया का पहला हाइड्रोजन बम टेस्ट किया था। उस वक्त 5 किलोमीटर चौड़ा एक विशाल, चकाचौंध कर देने वाला सफेद आग के गोले ने आसमान को ढक लिया था। हाइड्रोजन बम नाभिकीय संलयन अभिक्रिया की वजह से होता है। इसमें बड़ी मात्रा में एनर्जी निकलने की वजह से बड़ा विस्फोट होता है। वहीं, परमाणु बम विस्फोट के पीछे नाभिकीय विखंडन होता है। हाइड्रोजन बम परमाणु बम से ज्यादा विनाशकारी होता है।
रिपोर्ट के अनुसार, एक हाइड्रोजन बम करीब 1,000 परमाणु बम जितना ताकतवार होता है। अगर, एक परमाणु बम नागासाकी जैसे छोटे शहर को ध्वस्त कर सकता है, तब एक शक्तिशाली हाइड्रोजन बम मिनटों में पूरे न्यूयॉर्क महानगर को नष्ट कर सकता है, जिसमें लाखों लोग मारे जा सकते हैं। सैन्य हलकों में इस बम को सिटी बस्टर के नाम से जाना जाता था। भारतीय परीक्षण से पहले अमेरिका के अलावा केवल चार अन्य देशों पूर्व सोवियत संघ, ब्रिटेन, फ्रांस और चीन ने हाइड्रोजन बम विस्फोट किए थे।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत के पास अग्नि-5 (5000-8000 किमी रेंज) जैसी मारक मिसाइलें हैं, जो पूरे पाकिस्तान को निशाना बना सकती हैं। वहीं, पृथ्वी-2 (350 किमी) और अग्नि-1 (700 किमी) छोटी दूरी के टार्गेट पर निशाना बनाने के लिए हैं। इन मिसाइलों की जद में पाकिस्तान के लाहौर, रावलपिंडी या इस्लामाबाद जैसे शहर जद में आते हैं।
वहीं पाकिस्तान भी परमाणु शक्ति वाला देश है और उसने अपनी ताकत को बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। 2024 की स्रिपी की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के पास 170 परमाणु बम हैं, जो भारत से सिर्फ 2 कम हैं। इन बमों की ताकत ज्यादातर 3-50 किलोटन के बीच है। पाकिस्तान के पास हाइड्रोजन बम होने का कोई ठोस सबूत नहीं है और उसके ज्यादातर बम नाभिकीय संलयन पर आधारित हैं, जो भारत के बमों से कम ताकतवर हैं।


