नई दिल्ली । आज से ठीक दो दशकों पहले जो टेक्नोलॉजी एक दुर्लभ एक्सपेरिमेंट भर थी आज वो मॉडर्न दुनिया का ब्रह्मास्त्र बन चुकी है। एक ऐसी ही तकनीक से हवा में गायब होने वाला सबसे खतरनाक फाइटर जेट तैयार किया गया। इस फाइटर जेट के आगे दुनिया के बड़े-बड़े हथियार फेल हो जाते हैं। दिलचस्प बात ये भी है यही पावर इस फाइटर जेट का प्रोडक्शन बंद होने का कारण भी बन गई। आगे जानें किस देश के पास अभी भी ये हथियार है और कौन सी सुपर पावर्स इसे दुनिया का सबसे खतरनाक फाइटर जेट बनाती हैं।
इस एयरफ़्रेम डिजाइन को और भी बेहतरीन बना देती है रडार-अवशोषित सामग्री की एक कोटिंग। इसकी सतह पर आयरन बॉल पेंट की कोटिंग है जो आने वाली रडार तरंगों को वापस परावर्तित करने के बजाय, उन्हें सूक्ष्म मात्रा में ऊष्मा में परिवर्तित कर देती है। विमान के थ्रस्ट वेक्टरिंग नोजल न केवल इसे अविश्वसनीय एजिलिटी देते हैं बल्कि ये इन्फ्रारेड डिटेक्शन से भी बचाते हैं। जहां पारंपरिक नोजल गर्म गैसों को एक सघन धारा में केंद्रित करते हैं, जो इन्फ्रारेड डिटेक्शन के लिए एकदम सही है, वहीं एफ-22 गैसों को एक बड़े क्षेत्र में फैलाता है, जिससे तापमान कम होता है और स्टेल्थ और भी बढ़ जाती है।
एफ-22 एयर डॉमिनेंस का एक मास्टरपीस है लेकिन इसकी कीमत और मुश्किल रख-रखाव की वजह से इसे कभी ज्यादा मात्रा में बनाया ही नहीं गया। अमेरिका ने इसे 2011 में बनाना बंद कर दिया था और एक्सपोर्ट फ्रेंडली हथियारों को बढ़ावा दिया था। इस लड़ाकू विमान का नाम है लॉकहीड मार्टिन एफ-22 रैप्टर, जिसे अमेरिका में तैयार किया गया था। एफ-22 रैप्टर एक दोहरे इंजन वाला जेट-संचालित हाईटेक विमान है, जो सभी मौसमों में काम करने की क्षमता रखा है, ये सुपरसोनिक स्टील्थ लड़ाकू विमान हवा में मानों गायब ही हो जाता है। इसके बेजोड़ स्टेल्थ फीचर इसकी बेमिसाल बनावट की वजह से है। विमान का हर किनारा, उसके पंखों से लेकर इनटेक तक, रडार तरंगों को रिसीवर की ओर रिफ्लेक्ट नहीं करता, बल्कि दूर रिफ्लेक्ट कर देता है। नियमित पैनल गैप के बजाय, एफ-22 रडार तरंगों को बिखेरने के लिए दांतेदार किनारों का उपयोग करता है, और रिफ्लेक्शन को रोकने के लिए इसके पिछले किनारों को कोणीय बनाया गया है।


