वनरक्षी के मांगों पर राज्य संघचलाएगा ट्विटर अभियान
संताल एक्सप्रेस संवाददाता
दुमका। झारखंड में वन रक्षकों की हड़ताल लगातार दूसरे दिन भी जारी रही. जहां एक ओर वन रक्षक इंसाफ मिलने तक हड़ताल जारी रखने की बात कह रहे हैं वहीं विभागीय सचिव को हड़ताल के बारे में जानकारी तक नहीं है.
धरना प्रदर्शन के दूसरे दिन संथाल परगना के सभी वनरक्षियों के द्वारा मुख्यमंत्री एवं अन्य अधिकारियों को व्यक्तिगत स्तर पर मांग पत्र भेजा गया जिसके माध्यम से अपने समस्याओं को उनके समक्ष रखा गया,
साथ ही यह निर्णय लिया गया कि संथाल परगना के स्थानीय विधायक एवं सांसदों को एक प्रतिनिधि मंडल गठित कर उनको भी अपने समस्याओं एवं मांगों से जल्द ही अवगत कराया जाएगा, शनिवार को धरना प्रदर्शन के दूसरे दिन सभी वनरक्षियों के द्वारा राज्य संघ के ट्विटर अभियान चलाने के निर्णय को समर्थन दिया गया.
हड़ताल पर बैठे वनरक्षक
के कारण संथाल परगना के साथ झारखंड की जंगल , वन्य जीव एवं खनिज संपदा की रक्षा के साथ-साथ इंसान और हाथियों के बीच संभावित टकराव को रोकना सवालों के घेरे में हैं. इसकी वजह है वन रक्षकों की अनिश्चितकालीन हड़ताल जो 16 अगस्त से शुरू हुई है. हड़ताल के दूसरे दिन झारखंड राज्य अवर वन सेवा संघ के महामंत्री मनोरंजन कुमार ने पत्रकारों को बताया कि उनकी मांग सौ फीसदी जायज है.
दुमका में हड़ताल पर बैठे
वनरक्षी चाहते हैं कि वनपाल के पद पर प्रमोशन से जुड़ी साल 2014 में बनी झारखंड राज्य अवर वन क्षेत्र कर्मी संवर्ग नियमावली को दोबारा लागू कर दिया जाए. क्योंकि हाल में जो संशोधित नियमावली आई है, उसके मुताबिक वनपाल के 50 फीसदी पद पर अब सीधी बहाली होगी. ऐसा होने से ज्यादातर वनरक्षी बिना प्रमोशन लिए सेवानिवृत्त हो जाएंगे.


