देवघर संताल एक्सप्रेस:-26 वीं पुण्य तिथि पर याद आए दिवंगत स्वतंत्रता सेनानी भुवनेश्वर पांडे दिवंगत पाण्डेय नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के थे।अनुयायी 1937 में किए थे पेट्रिआँट पार्टी का गठन1952 के विधान सभा चुनाव में विनोदानन्द झा को पराजित कर बने थे।पहला विधायक 1942 के आनदोलन में इनकी रही महत्वपूर्ण भूमिका युवाओं के प्रेरणा श्रोत थे दिवंगत पाण्डेय नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की देवघर आगमन में दिवंगत पाण्डेय ने निभाई थी बिगुलर पार्टी की भूमिका नगर निगम क्षेत्र रोहिणी पाण्डेय टोला में सोमवार को स्वतंत्रता सेनानी व जिला का पहला विधायक भुवनेश्वर पांडे की 26 वीं पुण्यतिथि विभिन्न स्थानों में धूमधाम से मनाया गया। पुस्तकालय के समीप लगे आदमकद प्रतिमा एवं रोहिणी शहीद स्थल में लगे शिलालेख पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया गया एवं उनके विचारों को आत्मसात किया गया। 1942 के आंदोलन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है समाज में जागरुकता लाने एवं युवाओं को देशभक्ति का पाठ पढाने के लिए उन्होंने देश भक्त पार्टी का गठन किया। गाँव में जुआ शराब को रोकने एवं महिलाओं के सशक्तिकरण एवं युवाओं के उत्थान के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाया ।राज्य संपोषित उच्च विद्यालय के निर्माण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।अनेक छोटे-छोटे संगठनों का निर्माण किया था। इनका जन्म नगर निगम क्षेत्र के रोहिणी गांव स्थित पाण्डेय टोला के कार्तिक पांडे उर्फ मनी के घर में 15 जुलाई 1915 ई को जन्म हुआ था। एक सामान्य ब्राह्मण परिवार में जन्म लेने के बाद उनके अंदर देशभक्ति की भावना कूट-कूट कर भरी थी और भारत माता के पांवों में लगी वेडियो को काटने के लिए इन्होंने अपने तमाम सांसारिक सुखों का परित्याग करते हुए आजादी की लड़ाई में कूद पड़े। सहजानंद सरस्वती के साथ किसान महासभा का गठन किया।रात्रि पाठशाला चलंत पुस्तकालय आदि का संचालन किया।युवाओं को नशा से दूर रखने के लिए उन्होंने नशा मुक्ति अभियान चलाया। 6 अगस्त 1998 के त्रयोदशी तिथि के दिन पंचतत्व में विलीन हुए थे। आम नागरिकों की इच्छा के अनुसार नगर भ्रमण के पश्चात उनके पार्थिव शरीर को रोहिणी शहीद स्थल में जलाया गया था तत्कालीन विधायक सुरेश पासवान ने उनका शिलालेख लगाया ।आजादी की लड़ाई में इन्हें कई बार जेल की हवा खानी पडी़।इनका नारा था कि हम टुटेगें तो टुटेगे मगर झुकेगें नहीं।इन्हें हिंदी अंग्रेजी संस्कृत और बांग्ला भाषा की जानकारी थी। 1952 ईस्वी में हुए विधानसभा चुनाव में विनोदानन्द झा जैसे शख्सियत को पराजित कर सत्ता पर काबिज हुए थे।ये सुभाष चंद्र बोस के अनुयायी थे तथा उनके आदर्शो पर ही चलकर आजादी की लड़ाई लडे़।फॉरवर्ड ब्लॉक का टिकट लेकर इन्होंने चुनाव में जीत दर्ज किया था। वे रोहिणी पंचायत के आजीवन मुखिया एवं स्वतंत्रता सेनानी के अध्यक्ष रहे। मौके पर सत्य नारायण पाण्डेय बीरबल पाण्डेय ,संतोष बर्णवाल, कृष्ण कान्त बर्णवाल, अमृत पाण्डेय, अनुप झा, धीरज मंडल धीरेन्द्र पाण्डेय, रमेश बर्णवाल, शंभु नाथ झा समेत काफी संख्या में लोग मौजूद थे।
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