कैम्ब्रिज में आर्थिक अपराध पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में बोले
अपराधियों की चालाकी और देशों के बीच कमजोर समन्वय बड़ी चुनौती
नई दिल्ली । भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने मनी लॉन्ड्रिंग और आर्थिक अपराधों से निपटने में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की कमी पर गंभीर चिंता जताई है। कैम्ब्रिज में आर्थिक अपराध पर आयोजित 43वें अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में उन्होंने कहा कि गैर-कानूनी तरीके से कमाए गए हर 100 रुपये में से अधिकारी और जांच एजेंसियां वास्तविक रूप से केवल करीब एक रुपया ही वसूल कर पाती हैं। उनके मुताबिक, आर्थिक अपराधियों की बढ़ती चालाकी और भगोड़ों के प्रत्यर्पण में देशों के बीच पर्याप्त सहयोग नहीं होना इसकी प्रमुख वजह है।
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि एक साल में दुनिया भर में होने वाली मनी लॉन्ड्रिंग की रकम इतनी बड़ी है कि उससे धरती के प्रत्येक व्यक्ति के लिए एक सामान्य लैपटॉप खरीदा जा सकता है। उन्होंने कहा कि अवैध संपत्ति के 100 हिस्सों में से 99 हिस्से अक्सर भाषणों और रिपोर्टों तक सीमित रह जाते हैं, जबकि वास्तविक रूप से केवल एक हिस्सा ही वापस हासिल हो पाता है। मुख्य न्यायाधीश ने अपने संबोधन में प्राचीन भारतीय राजनीतिक रणनीतिकार कौटिल्य के ‘अर्थशास्त्र’ का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि कौटिल्य ने राजस्व व्यवस्था में भ्रष्टाचार की संभावना को पहचाना था और इसके समाधान के लिए ऑडिट, क्रॉस-वेरिफिकेशन तथा गलत तरीके से अर्जित संपत्ति की जब्ती जैसे उपायों पर जोर दिया था।
सीजेआई ने कहा कि आधुनिक दौर में भारत ने आर्थिक अपराधों से निपटने के लिए कई स्तरों पर कानून और न्यायिक उपाय विकसित किए हैं। इनका उद्देश्य अपराध से निपटने के साथ-साथ कानूनी अधिकारों और प्रक्रियात्मक सुरक्षा के बीच संतुलन कायम करना है।
संधियां हैं, लेकिन संपत्ति की वसूली बेहद कम
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि भारत ने दूसरे देशों के साथ प्रत्यर्पण और आपसी कानूनी सहायता संधियां की हैं, लेकिन इसके बावजूद विदेशों में मौजूद अवैध संपत्ति और आर्थिक अपराध से जुड़ी रकम को वापस लाने में सफलता सीमित रही है। उन्होंने कहा कि अवैध संपत्ति और आर्थिक अपराधों का विस्तार अंतरराष्ट्रीय संधियों को मंजूरी मिलने की गति से भी तेज है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी देश, चाहे उसके पास कितने भी संसाधन क्यों न हों, अकेले सीमा-पार आर्थिक अपराधों का प्रभावी ढंग से मुकाबला नहीं कर सकता। इसके लिए देशों को जब्ती आदेश, लाभकारी स्वामित्व की जानकारी, वित्तीय खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान और संपत्ति फ्रीज करने जैसे उपायों को एक साथ लागू करना होगा।
विजय माल्या और नीरव मोदी का किया जिक्र
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि भारत ने भगोड़ों के प्रत्यर्पण के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रक्रियाएं शुरू की हैं। उन्होंने विजय माल्या और नीरव मोदी के मामलों का उदाहरण देते हुए बताया कि भारत ने क्रमशः 2017 में ब्रिटेन और 2018 में अमेरिका के साथ प्रत्यर्पण प्रक्रिया शुरू की थी, लेकिन दोनों मामलों में अब तक प्रत्यर्पण नहीं हो सका है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि आर्थिक अपराधों से निपटने के लिए कानून और संस्थागत तंत्र की कमी नहीं है। असली जरूरत राज्यों के बीच साझा कार्रवाई की इच्छाशक्ति और त्वरित समन्वय की है, ताकि एक देश में जारी कार्रवाई का असर दूसरे देश में मौजूद अवैध संपत्ति पर भी तुरंत दिखाई दे।


