मुम्बई । इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में इम्पैक्ट प्येयर नियम लागू किये जाने के बाद से ही विवादों में रहा है। इस नियम का कड़ा विरोध भी होता रहा है, कई दिग्गज क्रिकेटरों ने समय-समय पर इस नियम को हटाने की मांग की है। वहीं अब भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) ने भी इस नियम पर पुनर्विचार करने का फैसला करते हुए सभी 10 फ्रेंचाइजी से इस संबंध में अपनी राय मांगी है। प्राप्त जानकारी के अनुसा सभी टीमों को सोमवार, 31 अगस्त तक इस बारे में अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी। इस नियम को पहली बार साल 2023 में लागू किया गया था और तभी से ये आलोचकों के निशाने रहा है। बीसीसीआई का यह नया कदम बताता है कि बोर्ड अब इस नियम को लेकर एक बड़ा और निर्णायक फैसला ले सकता है।
इसको हटाने की मांग करने वालों का तर्क है कि
इम्पैक्ट प्लेयर नियम से खेल का संतुलन बिगड़ गया है। इससे ऑलराउंडरों के अवसर कम होते हैं। इसे अक्सर गेंदबाज-विरोधी नियम करार दिया जाता है। पिछले आईपीएल सीज़न (2024) में इस नियम की वजह से 200 से अधिक के स्कोर पहले से कहीं ज्यादा बार देखने को मिले, जिसने बल्लेबाजों का दबदबा और बढ़ा दिया। इससे मैच एकतरफा होने से मैच जहां नीरस हो गये। वहीं गेंदबाजों को भी अपनी प्रतिभा दिखाने के अवसर नहीं मिल रहे। गौरतलब है कि रोहित शर्मा से लेकर श्रेयस अय्यर, हार्दिक पांड्या और शुभमन गिल जैसे कई शीर्ष भारतीय खिलाड़ियों ने इस नियम का विरोध किया था।
वहीं पिछले साल बीसीसीआई ने संकेत दिया था कि इम्पैक्ट प्लेयर का नियम कम से कम एक और साल के लिए जारी रहेगा पर अब बोर्ड समीक्षा ही नहीं इसे हटाने पर भी विचार कर रहा है। बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने पहले इस नियम का बचाव किया था पर अब वह भी इसकी समीक्षा को तैयार हैं। इस नियम की शुरुआत 2023 में हुई थी, जिसका उद्देश्य खेल में रणनीतिक गहराई जोड़ना था।
अब देखना है कि अगले आईपीएल से पहले ये नियम हट पाता है या नहीं।
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