नई दिल्ली । ब्रिक्स समूह वैश्विक मंच पर अपना प्रभाव लगातार बढ़ा रहा है, जिसका आकर्षण उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए बढ़ता जा रहा है। एक ओर जहां पाकिस्तान इस प्रभावशाली समूह में शामिल होने के लिए लगातार प्रयासरत है, वहीं दूसरी ओर भारत की मेजबानी में हुए एक सम्मेलन के दौरान ब्रिक्स देशों ने वैश्विक व्यापार में मनमाने टैरिफ और व्यापार प्रतिबंधों को लेकर कड़ी चिंता व्यक्त की है।
पाकिस्तान लंबे समय से ब्रिक्स की सदस्यता पाने की कोशिश कर रहा है और उसने 2023 में औपचारिक आवेदन भी किया था। आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा पाकिस्तान अपने लिए नए अंतरराष्ट्रीय वित्तीय और व्यापारिक रास्ते तलाश रहा है, खासकर न्यू डेवलपमेंट बैंक जैसे संस्थानों तक पहुंच बनाकर विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष पर अपनी निर्भरता कम करने की उम्मीद में। हालांकि, ब्रिक्स में नए सदस्यों को शामिल करने का फैसला आम सहमति से होता है, और पाकिस्तान की सदस्यता की राह में भारत की सहमति एक बड़ी राजनीतिक अड़चन मानी जाती है। भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी तनाव के कारण भारत की सहमति के बिना पाकिस्तान की सदस्यता मुश्किल दिखती है, भले ही उसे रूस और चीन जैसे देशों से समर्थन की उम्मीद हो। इसी बीच, ब्रिक्स के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक के गवर्नरों ने एकतरफा टैरिफ और व्यापार से जुड़े दूसरे प्रतिबंधों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। हालांकि, बयान में किसी देश या राष्ट्रपति का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया गया, लेकिन इसमें जिस तरह एकतरफा व्यापार और वित्तीय कदमों, ऊंचे टैरिफ और व्यापार बाधाओं का जिक्र किया गया है, उसे अमेरिका की मौजूदा व्यापार नीति, विशेषकर पूर्व राष्ट्रपति की नीतियों, के साथ जोड़कर देखा जा रहा है। समूह के सदस्यों ने कहा कि ऐसे कदम वैश्विक व्यापार में गंभीर गड़बड़ी पैदा कर रहे हैं, जो विश्व व्यापार संगठन के नियमों के अनुरूप नहीं हैं। ब्रिक्स देशों ने एक ऐसी वैश्विक व्यापार व्यवस्था का समर्थन किया है जो खुली, पारदर्शी, गैर-भेदभाव वाली और नियमों पर आधारित हो। उन्होंने भू-राजनीतिक तनाव, व्यापारिक विभाजन, नीतिगत अनिश्चितता और बढ़ते कर्ज जैसी मौजूदा वैश्विक आर्थिक चुनौतियों का भी उल्लेख किया, जिनका सबसे अधिक असर उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहा है। ब्रिक्स साफ तौर पर चाहता है कि दुनिया के देशों के बीच व्यापार के नियम सभी के लिए एक जैसे हों और कोई एक देश अपनी तरफ से ऐसे फैसले न ले, जिससे दूसरे देशों के कारोबार पर अचानक बड़ा असर पड़े।
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