इसकी गति 75 नॉट से ज्यादा और परिचालन ऊंचाई 15,000 फीट तक होगी
नई दिल्ली । भारतीय नौसेना ने मीडियम रेंज लोइटरिंग म्यूनिशन सिस्टम के लिए रिक्वेस्ट फॉर इन्फॉर्मेशन जारी किया है, जिसमें 1,000 किलोमीटर से ज्यादा ऑपरेशनल रेंज और 9 घंटे से ज्यादा लोइटर टाइम की क्षमता मांगी गई है। यह प्रणाली लंबे समय तक हवा में रहकर लक्ष्य पर नजर रख सकेगी और सटीक समय पर हमला कर पाएगी, जिससे भारतीय नौसेना की ताकत में इजाफा होगा। रिपोर्ट के मुताबिक इस प्रस्तावित हथियार को युद्धपोतों के साथ-साथ जमीन से भी लॉन्च किया जा सकेगा और इसे कंटेनर में रखकर संचालित किया जाएगा। इसकी गति 75 नॉट से ज्यादा और परिचालन ऊंचाई 15,000 फीट तक होगी। सिस्टम में इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल और इंफ्रारेड सेंसर वाला मॉड्यूलर सीकर लगा होगा, जो लक्ष्य की निगरानी और अंतिम चरण में मार्गदर्शन प्रदान करेगा। खास बात यह है कि यह प्रणाली जीएनएसएस यानी सामान्य सैटेलाइट नेविगेशन उपलब्ध न होने पर भी स्वायत्त तरीके से काम करने में सक्षम होगी, जो इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के माहौल में इसकी प्रभावशीलता को बढ़ाएगी।
एक मिशन कंट्रोल यूनिट एक साथ 10 म्यूनिशन तक संभाल सकेगी, और नियंत्रण को जहाज व जमीन पर मौजूद कंट्रोल स्टेशन के बीच भी बदला जा सकेगा। यह लोइटरिंग म्यूनिशन ब्रह्मोस जैसी महंगी क्रूज मिसाइलों का एक लागत प्रभावी विकल्प प्रदान करेगा। यह हथियार किसी इलाके में घंटों मंडरा सकता है, लक्ष्य की स्थिति बदलने पर हमले को टाला जा सकता है और जरूरत पड़ने पर एक साथ कई प्रणालियों का इस्तेमाल किया जा सकता है। हिंद महासागर क्षेत्र में चीन और पाकिस्तान की बढ़ती नौसैनिक गतिविधियों के मद्देनजर, 1,000 किलोमीटर से ज्यादा रेंज वाला यह समुद्र-आधारित सिस्टम भारत के लिए सामरिक रूप से अहम होगा। पाकिस्तान नौसेना द्वारा हाल ही में अपने मुदमैर लोइटरिंग म्यूनिशन के प्रदर्शन के बाद भारत के लिए ऐसा हथियार जरुरी हो जाता है।
रिपोर्ट के मुताबिक भारत में कई निजी और स्वदेशी कंपनियां लंबी दूरी के ड्रोन और लोइटरिंग म्यूनिशन पर काम कर रही हैं, जैसे न्यूस्पेस रिसर्च एंड टेक्नोलॉजीज का शेषनाग-150। आरएफआई में बाय इंडियन-आईडीडीएम या बाय इंडियन श्रेणी के तहत खरीद का रास्ता रखा गया है, जिससे घरेलू रक्षा उद्योग को भी प्रोत्साहन मिलेगा। यह कदम केवल एक नए ड्रोन की खरीद नहीं, बल्कि समुद्री युद्ध की बदलती तस्वीर और भारत की दीर्घकालिक निगरानी व स्ट्राइक क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक गेमचेंजर साबित होगा।


