● 9 से 12 माह का मानदेय न मिलने से भुखमरी की कगार पर पहुंचे स्वास्थ्य कर्मी, कार्य बहिष्कार का किया ऐलान
● कायाकल्प आउटसोर्सिंग एजेंसी के तहत काठीकुंड, मधूबन समेत कई केंद्रों के 38 से अधिक कर्मचारी आंदोलन में शामिल
● सिविल सर्जन और अन्य अधिकारियों को सौंपा ज्ञापन, वेतन भुगतान होने तक हड़ताल जारी रखने की सख्त चेतावनी
ब्यूरो
दुमका: जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा संकट मंडराने लगा है। जिले के विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों में कायाकल्प आउटसोर्सिंग एजेंसी के तहत कार्यरत कर्मचारियों ने अपने बकाया मानदेय की मांग को लेकर प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शनिवार से इन सभी स्वास्थ्य कर्मियों ने एक साथ मिलकर अनिश्चितकालीन हड़ताल की शुरुआत कर दी है। कर्मचारियों का आरोप है कि पिछले 9 से 12 महीनों से उन्हें उनके मासिक मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है, जिसके कारण उनके परिवारों के सामने गंभीर आर्थिक संकट पैदा हो गया है और वे दाने-दाने को मोहताज हो रहे हैं।
अपनी इसी बदहाली से नाराज होकर कर्मियों ने अंततः कामकाज पूरी तरह से ठप करने का कड़ा फैसला लिया है। इस बड़े विरोध प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में स्वास्थ्य कर्मियों ने एकजुट होकर एक हस्ताक्षरित आवेदन पत्र भी जारी किया है। यह ज्ञापन चिकित्सा पदाधिकारी, सिविल सर्जन दुमका, कल्याण आयुक्त, मुख्य विकास पदाधिकारी और बीएमआर के विशेष नियंत्रण से संबंधित अधिकारियों को सौंपते हुए अपनी सामूहिक उपस्थिति दर्ज कराई है। कर्मियों ने प्रशासन को स्पष्ट तौर पर सूचित कर दिया है कि जब तक उनके रोके गए महीनों के वेतन का पूर्ण भुगतान नहीं किया जाता, तब तक वे पूरी मुस्तैदी के साथ अपने इस अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार पर डटे रहेंगे।
इस व्यापक हड़ताल में विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों के लैब तकनीशियन, एएनएम, जीएनएम, फार्मासिस्ट, कोल्ड चेन हैंडलर और हाउसकीपिंग स्टाफ समेत दर्जनों जरूरी कर्मचारी शामिल हैं। जानकारी के अनुसार, काठीकुंड, मधूबन, नरगंज, अमदाले, भण्डारो और लालपुर जैसे कई प्रमुख स्वास्थ्य केंद्रों के कुल 38 से अधिक कर्मियों ने अपने पद, कार्यस्थल और हस्ताक्षर के साथ इस आंदोलन को अपना लिखित समर्थन दिया है। इन तमाम महत्वपूर्ण कर्मचारियों के एक साथ हड़ताल पर चले जाने से ग्रामीण और स्थानीय स्तर पर मरीजों की मुश्किलें अचानक से बढ़ गई हैं और स्वास्थ्य सेवाओं के बुरी तरह प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। प्रशासन के लिए अब जल्द से जल्द इस मामले को सुलझाना एक बड़ी चुनौती बन गया है।


