मुंबई । सपनों की दुनियां का आसमान बॉलीवुड में सितारों को मिले उपनाम अक्सर उनकी पहचान बनते रहे हैं। अमिताभ बच्चन एंग्री यंग मैन तो अक्षय कुमार खिलाड़ी कुमार और जितेंद्र जंपिंग जैक के नाम से मशहूर हुए। इसी तरह हिंदी सिनेमा के इतिहास में एक नाम ऐसा भी है जिसकी मर्दाना छवि और दमदार कद–काठी ने उन्हें हीमैन का ख़िताब दिलाया, और वह नाम है धर्मेंद्र।
वैसे यह सवाल आज भी दिलचस्प है कि आखिर धर्मेंद्र को यह पहचान किस फिल्म ने दिलाई? जवाब मिलता है 1966 की सुपरहिट फिल्म फ़ूल और पत्थर ने। इस फिल्म ने न सिर्फ उनके करियर को नई दिशा दी, बल्कि उन्हें बॉलीवुड का पहला “हीमैन” बना दिया।
दरअसल धर्मेंद्र ने अपने करियर की शुरुआत 1960 में अर्जुन हिंगोरानी की फिल्म ‘दिल भी तेरा हम भी तेरे’ से की थी। शुरुआती फिल्मों में रोमांटिक और सपोर्टिंग भूमिकाएं करते हुए वे दर्शकों के बीच अपनी खास पहचान बनाने के लिए संघर्षरत रहे। लेकिन 1966 में रिलीज़ हुई ओ.पी. रलहन की फिल्म ‘फ़ूल और पत्थर’ ने उनका स्टारडम तय कर दिया। इस फिल्म में उन्होंने शक्ति सिंह (शाका) का किरदार निभाया। यह एक ऐसा किरदार था जो मजबूत, भावुक और प्रभावशाली कहा गया। पर फिल्म का सबसे बड़ा आकर्षण वह दृश्य था, जिसमें धर्मेंद्र पहली बार शर्टलेस अवतार में दिखाई दिए। हिंदी सिनेमा में यह एक क्रांतिकारी क्षण था, क्योंकि इससे पहले किसी अभिनेता ने इस अंदाज़ में अपनी बॉडी स्क्रीन पर प्रदर्शित नहीं की थी। दर्शकों ने उनके इस नए रूप को जबरदस्त प्यार दिया। उनकी फिटनेस, दबंग व्यक्तित्व और स्क्रीन पर छाए आत्मविश्वास ने उन्हें बाकी सितारों से अलग कर दिया।
जावेद अख्तर भी बता चुके हैं ‘हीमैन’ की स्टोरी
मशहूर फिल्म गीतकार और लेखक जावेद अख्तर ने एक टीवी रियलिटी शो में बताया था कि ‘फ़ूल और पत्थर’ की सफलता के बाद ही धर्मेंद्र को हीमैन कहा जाने लगा। यह उपनाम उन्हें एक ऐसा दर्जा देता है, जो आज तक किसी और अभिनेता को उसी ऊंचाई पर नहीं मिला।
एक्शन हीरो की छवि और लंबा सफर
भले ही शुरुआत रोमांटिक किरदारों से हुई हो, लेकिन ‘फ़ूल और पत्थर’ के बाद धर्मेंद्र एक्शन हीरो के रूप में स्थापित हो गए। आने वाले वर्षों में उन्होंने 300 से अधिक फिल्मों में काम किया और अपनी मर्दाना छवि, दमदार एक्शन और गहरी संवेदनाओं के मेल से दर्शकों के दिलों में अमिट जगह बना ली।
धर्मेंद्र सिर्फ पर्दे के हीमैन नहीं थे, बल्कि उस दौर की हिंदी फिल्मों में पुरुषत्व, संजीदगी और स्टारडम की एक नई परिभाषा लेकर आए। भले आज धर्मेंद्र सशरीर हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन आज भी जब हिंदी सिनेमा के सबसे प्रभावशाली सितारों की बात होती है, तो धर्मेंद्र का नाम सम्मान और गर्व के साथ लिया जाता है, क्योंकि हीमैन सिर्फ एक उपनाम नहीं, बल्कि धर्मेंद्र की सदाबहार विरासत है।


