मुंबई । महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव की तारीखों का अभी ऐलान नहीं हुआ है। सियासी दल चुनावी अखाड़े में जब कूदेंगे तब कूदेंगे, इससे पहले सीट बंटवारे को लेकर दो दो हाथ होने की जमीन तैयार होती दिखाई दे रही है। महायुति में सीट शेयरिंग पर जिस तरह का पेंच फंसा दिखाई दे रहा है उससे लगता है कि मामला इतनी आसानी से नहीं सुलझ पाएगा। वजह ये है कि राज्य में कुल 288 विधानसभा सीटें हैं। भाजपा चाहती है कि 160 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे तो शिंदे की शिवसेना 105 सीटों पर लड़ने का मन बना चुकी है जबकि अजित पवार की एनसीपी 80 सीटों का सपना देख रही है। यदि इन सभी सीटों को जोड़ दिया जाए तो इनकी संख्या 345 होती है, मतलब 57 अतिरिक्त सीटें कहां से आएंगी। बस,यहीं पेंच फंसेगा और सियासी घमासान मचेगा।
मीडिया में आ रहीं खबरों के मुताबिक एक पदाधिकारी ने बताया कि केंद्रीय गृहमंत्री शाह के दौरे के दौरान शिवसेना ने 100 से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने की बात रखी है। उन्होंने बताया कि शाह के सामने पूर्व में अविभाजित शिवसेना के साथ-साथ लोकसभा चुनाव में भी पार्टी के प्रदर्शन को प्रेजेंटेशन दिया गया। उन्होंने कहा, हमें मिलने वाले मराठी और हिंदुत्व वोट बरकरार रहे।उन्होंने कहा, अपने दम पर शिवसेना (यूटीबी) ज्यादा वोट नहीं ले पाएगी। वो इंडिया ब्लॉक के कारण उसे वोट मिलेंगे। अगर हमें 100 से ज्यादा सीटें मिलती हैं, तो ही हम शिवसेना (यूबीटी) का मुकाबला कर पाएंगे और महाविकास अघाड़ी (एमवीए) को हरा पाएंगे। रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों का कहना है कि सीट शेयरिंग फॉर्मूले पर इस महीने के अंत तक मुहर लग सकती है। उन्होंने संभावनाएं जताई हैं कि शिवसेना को 80 से 90 सीटें और एनसीपी को 50 से 60 सीटें मिल सकती हैं। खास बात है कि डिप्टी सीएम पवार 25 सीटों पर भाजपा के साथ फ्रेंडली फाइट की खबरों का खंडन कर चुके हैं। जबकि रिपोर्ट के अनुसार, शिवसेना 100 से 105 सीटों पर दावा पेश कर रही है। वहीं, भाजपा 160 सीटों पर उम्मीदवार उतारना चाहती है। जबकि, उपमुख्यमंत्री अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी 60 से 80 सीटों पर चुनाव लड़ने की इच्छा जता रही है। महाराष्ट्र में विधानसभा सीटों की कुल संख्या 288 है। इससे पहले साल 2019 का विधानसभा चुनाव भाजपा और अविभाजित शिवसेना ने साथ मिलकर लड़ा था।
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